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नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा : धामी!

‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ में गूंजा विकसित उत्तराखंड का संकल्प, 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने साझा किए अपने सपने और विचार !

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो

देहरादून/श्रीनगर। उत्तराखंड के भविष्य की तस्वीर कैसी होगी? पहाड़ों से पलायन कैसे रुकेगा? युवा नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला कैसे बनेगा? गांवों में शिक्षा, बिजली, पानी और बेहतर सुविधाएं कैसे पहुंचेंगी? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में प्रदेशभर के युवाओं की आवाज गूंजी।

‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया और उनके सपनों, सुझावों तथा भविष्य के उत्तराखंड की कल्पना को जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के उत्तराखंड और भारत का नेतृत्व करेंगे। युवाओं की सोच और ऊर्जा प्रदेश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को बड़ा संदेश देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल नौकरी तलाशना नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और सोच को सकारात्मक दिशा में लगाएं तथा आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें।

2.67 लाख विद्यार्थियों ने बताया अपने सपनों का उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान के तहत प्रदेशभर से 2,67,744 विद्यार्थियों ने निबंध और अपने विचार भेजे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के विचारों में उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य को लेकर उनकी संवेदनशीलता और संकल्प साफ दिखाई देता है।

उन्होंने विद्यार्थियों के निबंधों की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने अपने विचार इतनी अच्छी तरह व्यक्त किए हैं कि यह तय करना कठिन है कि किसने अच्छा लिखा और किसने बहुत अच्छा।

पलायन पर छात्रा सीमा की बात ने खींचा ध्यान

संवाद के दौरान रुद्रप्रयाग की कक्षा 11 की छात्रा सीमा सेमवाल ने पलायन विषय पर लिखे अपने निबंध के बारे में मुख्यमंत्री को बताया कि उसने इसे दो-तीन दिनों में लिखा है। पलायन को विषय चुनने की वजह बताते हुए छात्रा ने कहा कि उसने इसे स्वयं महसूस किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्य रूप से स्थायी और अस्थायी—दो प्रकार का पलायन देखने को मिलता है। शिक्षा और रोजगार के लिए युवाओं का बाहर जाना हमेशा नकारात्मक नहीं है। बाहर जाकर शिक्षा, अनुभव और नई जानकारी हासिल करने से युवाओं को बेहतर अवसर मिलते हैं, लेकिन पहाड़ों से स्थायी पलायन गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि पहाड़ की माताएं और बहनें कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार और समाज को संभाल रही हैं। उनकी भूमिका और संघर्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गांवों तक सुविधाएं पहुंचाने का दावा, फिर भी ‘बहुत कुछ करना बाकी’

छात्रा अनुष्का ने पलायन रोकने के उपायों पर अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं। सरकार गांव-गांव तक बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

हालांकि मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 500 से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित होने और रिवर्स माइग्रेशन की प्रक्रिया शुरू होने की बात भी कही।

नशे से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाएं युवा

मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में भारत कैसा होगा, उसमें युवाओं की क्या भूमिका होगी और व्यवस्थाएं कैसी होनी चाहिए, इन सवालों पर युवाओं की सोच बेहद महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सपनों को लक्ष्य में बदलें, निरंतर मेहनत करें और अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा का इस्तेमाल प्रदेश और देश के निर्माण में करें।

मुख्यमंत्री का संदेश साफ था—उत्तराखंड का भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों, संकल्प और मेहनत से आकार लेगा। सवाल अब यह है कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ में युवाओं ने जो सपने लिखे हैं, उनमें से कितने सपने सरकार की नीतियों और जमीन पर उतरते विकास में बदल पाते हैं।

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