चुनावी दस्तक के साथ ‘जीवित’ हुई बिंदुखत्ता की फाइल
राजस्व ग्राम की घोषणा फिर लौटी, सियासत गरम।
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो देहरादून/लालकुआं।
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच लंबे समय से लंबित बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के अनुरोध पर पूर्व में विलोपित की जा चुकी मुख्यमंत्री घोषणा को पुनः जीवित करने को मंजूरी दे दी है।
राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद जहां क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है, वहीं राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी समय से जोड़कर देखा जा रहा है।
वर्षों पुरानी मांग, फाइलों में उलझा समाधान!
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की प्रक्रिया पूर्व में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत शुरू की गई थी। लेकिन क्षेत्र वन भूमि की श्रेणी में आने के कारण भारत सरकार से वन विभाग की अनापत्ति (एनओसी) अनिवार्य होने से मामला प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रियाओं में उलझ गया।
लंबी प्रक्रिया और नीतिगत निर्णय लंबित रहने के चलते जुलाई 2025 में आयोजित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक के बाद राजस्व विभाग ने घोषणा को सूची से हटाने का प्रस्ताव भेजा, जिसे बाद में विलोपित कर दिया गया था।
चुनावी मौसम में फिर सक्रिय हुई घोषणा
अब, चुनावी माहौल बनने के बीच उसी घोषणा को पुनर्जीवित किए जाने के फैसले ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्षी दल इसे “घोषणा बनाम हकीकत” की राजनीति बताते हुए सवाल उठा रहे हैं कि वर्षों से लंबित मांग पर ठोस निर्णय चुनावी समय में ही क्यों दिखाई देता है।
उम्मीद और संशय साथ-साथ!
करीब चार दशक से राजस्व ग्राम का दर्जा पाने की मांग कर रहे बिंदुखत्ता क्षेत्र के निवासियों के लिए यह फैसला उम्मीद जरूर लेकर आया है। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि यदि वैधानिक और वन संबंधी बाधाएं शीघ्र दूर नहीं हुईं, तो यह मुद्दा फिर प्रशासनिक प्रक्रिया में अटक सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में बिंदुखत्ता अब केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या इस बार घोषणा जमीन पर उतरेगी, या फिर बिंदुखत्ता की फाइल अगली चुनावी दस्तक तक इंतजार करेगी।
