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कालाढूंगी में सियासी घमासान तेज, विधायक-महापौर के बीच तेज हुए बयानों के तीर!

छात्रसंघ चुनाव से शुरू हुई जुबानी जंग अब 2027 की दावेदारी तक पहुंची, भगत बोले—अतीत देखिए, गजराज ने कहा—बुजुर्ग नेता का जवाब नहीं दूंगा!

दर्पण न्यूज 24/7हल्द्वानी।

कालाढूंगी विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव की आहट के साथ भाजपा के भीतर सियासी सरगर्मी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। मौजूदा विधायक बंशीधर भगत और हल्द्वानी के महापौर गजराज सिंह बिष्ट के बीच पिछले कुछ दिनों में जिस तरह बयानों के तीर चले हैं, उसने इस विधानसभा सीट की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ताजा विवाद छात्रसंघ चुनाव के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ, लेकिन इसके पीछे कालाढूंगी विधानसभा की दावेदारी का सवाल भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है।

29 सितंबर को हल्द्वानी में छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर कथित लाठीचार्ज के मामले में महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने दावा किया कि एबीवीपी के प्रदेश संगठन मंत्री अंकित सुंद्रियाल को हिरासत में लिया गया तथा जिला संगठन मंत्री कैलाश बिष्ट के साथ मारपीट की गई।

गजराज ने अपने बयान में कांग्रेस शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में भी छात्र संगठनों के साथ संवाद की परंपरा थी और स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश विचारधारा से अलग होने के बावजूद छात्र नेताओं से संवाद करती थीं।

महापौर के इस बयान पर जब कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत से प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने कहा कि गजराज बिष्ट ने कांग्रेस शासन के दौरान पुलिस के व्यवहार को शायद नहीं देखा है। भगत ने कहा कि यदि उन्हें उस समय के घटनाक्रमों की जानकारी होती तो वह इस तरह का बयान नहीं देते। भगत की इस टिप्पणी को महापौर पर राजनीतिक पलटवार के तौर पर देखा गया।

इसके बाद गजराज बिष्ट ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बंशीधर भगत वरिष्ठ और बुजुर्ग नेता हैं तथा वह उनका सम्मान करते हैं, इसलिए उनकी बात का जवाब नहीं देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी का कोई गंभीर और वरिष्ठ नेता टिप्पणी करता तो वह जरूर जवाब देते। महापौर की इस टिप्पणी ने दोनों नेताओं के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को और चर्चा में ला दिया।

पुरानी तल्खी, नया बहाना!

दोनों नेताओं के बीच यह पहला राजनीतिक टकराव नहीं है। नगर निगम चुनाव के दौरान भी गजराज बिष्ट और बंशीधर भगत के बीच मतभेद सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे थे। 2025 के नगर निगम चुनाव में गजराज बिष्ट भाजपा के मेयर प्रत्याशी थे और बंशीधर भगत की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई थी।

इसके बाद पंचायत चुनाव ने दोनों नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक प्रभाव क्षेत्रों को फिर सामने ला दिया। कालाढूंगी क्षेत्र की रामड़ी आनसिंह-पनियाली जिला पंचायत सीट पर भाजपा समर्थित निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया के सामने पार्टी की बागी प्रत्याशी डॉ. छवि कांडपाल बोरा मैदान में थीं। भगत जहां बेला तोलिया के पक्ष में सक्रिय बताए गए, वहीं गजराज बिष्ट पर छवि कांडपाल के समर्थन का आरोप लगा। चुनाव परिणाम में छवि कांडपाल की जीत के बाद उनके गजराज बिष्ट से मिलने और महापौर द्वारा उनका स्वागत किए जाने की तस्वीरें भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनीं।

अब असली मुद्दा—कालाढूंगी की अगली दावेदारी

कालाढूंगी की राजनीति में मौजूदा विवाद को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं है। बंशीधर भगत पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह रिटायर नहीं हुए हैं और यदि पार्टी उन्हें टिकट नहीं देती है तो वह अपने बेटे विकास भगत को टिकट दिए जाने की इच्छा रखते हैं।

वहीं विकास भगत की क्षेत्र में सक्रियता भी लगातार बनी हुई है। हाल ही में उन्होंने कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र के आनंदपुर में जनसंवाद कार्यक्रम कर सरकार और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर कार्यकर्ताओं से संवाद किया।

दूसरी ओर महापौर गजराज सिंह बिष्ट भी कालाढूंगी से अपनी दावेदारी को लेकर खुलकर सामने आ चुके हैं। यही वह बिंदु है जहां दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद को विधानसभा टिकट की संभावित प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट भी फरवरी 2026 में कालाढूंगी सीट से अपनी दावेदारी सार्वजनिक कर चुके हैं।

भगत बनाम गजराज से आगे भी है कहानी !

कालाढूंगी में राजनीतिक मुकाबला फिलहाल केवल दो चेहरों के बीच सीमित नहीं है। भाजपा के भीतर कई नेता अलग-अलग स्तर पर सक्रिय हैं और टिकट को लेकर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं। ऐसे में बंशीधर भगत की राजनीतिक विरासत, विकास भगत की सक्रियता, गजराज बिष्ट की दावेदारी और अन्य नेताओं की महत्वाकांक्षा ने कालाढूंगी को भाजपा की अंदरूनी राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है।

ताजा बयानबाजी का तत्काल कारण छात्रसंघ चुनाव और पुलिस कार्रवाई है, लेकिन राजनीतिक संकेत इससे कहीं आगे तक जाते दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि आने वाले महीनों में यह जुबानी जंग कितनी आगे बढ़ती है और कालाढूंगी में टिकट की दौड़ किस रूप में आकार लेती है। फिलहाल इतना जरूर है कि कालाढूंगी विधानसभा की सियासत में बयान अब सिर्फ बयान नहीं रह गए हैं—हर टिप्पणी के पीछे 2027 की संभावित राजनीतिक दावेदारी की परछाईं दिखाई देने लगी है।

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