

कुमाऊं में राम माधव की गोपनीय बैठकों से भाजपा में बढ़ी चुनावी हलचल!
आठ सांगठनिक जिलों के अध्यक्षों से वन-टू-वन संवाद, विधायकों के कामकाज से लेकर टिकट के दावेदारों तक का लिया फीडबैक!
हल्द्वानी। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा ने कुमाऊं में संगठनात्मक स्तर पर हलचल तेज कर दी है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी राम माधव का गोपनीय कुमाऊं दौरा इसी रणनीतिक तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। आठ सांगठनिक जिलों के जिलाध्यक्षों से अलग-अलग मुलाकात कर उन्होंने संगठन की नब्ज टटोलने के साथ संभावित प्रत्याशियों और मौजूदा विधायकों की स्थिति का फीडबैक भी लिया।
राम माधव ने नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, काशीपुर, रानीखेत, अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के जिलाध्यक्षों से वन-टू-वन बातचीत की। इन बैठकों में संगठन की सक्रियता, सरकार के कामकाज की जमीनी स्थिति, क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण और आगामी विधानसभा चुनाव में संभावित टिकट दावेदारों को लेकर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
टिकट के दावेदारों की लोकप्रियता और विधायकों का रिपोर्ट कार्ड!
सूत्रों के मुताबिक, जिलाध्यक्षों से संभावित प्रत्याशियों की क्षेत्र में लोकप्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता और संगठनात्मक पकड़ को लेकर जानकारी मांगी गई। मौजूदा विधायकों के कामकाज तथा उनके प्रति जनता की धारणा पर भी फीडबैक लिया गया। सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का जनता के बीच कितना असर है, यह भी चर्चा का विषय रहा।
खास बात यह रही कि सभी जिलाध्यक्षों से सामूहिक बैठक के बजाय अलग-अलग बातचीत की गई। राजनीतिक हलकों में इसे चुनाव से पहले जमीनी हकीकत और संगठन की आंतरिक रिपोर्ट जुटाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन नेताओं की बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है, जो आगामी चुनाव में भाजपा के टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
संगठन की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगे की रणनीति?
दौरे के दौरान कुमाऊं में रहने वाले कुछ प्रदेश पदाधिकारियों ने भी राम माधव से मुलाकात की। ऐसे में इस दौरे को केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित मानना मुश्किल है। हालांकि बैठकों के वास्तविक एजेंडे और उनके निष्कर्षों को लेकर भाजपा ने कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिलाध्यक्षों से मिले फीडबैक का पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति और टिकट चयन में कितना असर होगा? क्या मौजूदा विधायकों को उनके कामकाज के आधार पर फिर से परखा जाएगा या संगठन नए चेहरों पर भी दांव लगाने की तैयारी कर रहा है?
राम माधव की गोपनीय बैठकों ने इन सवालों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें भाजपा के अगले संगठनात्मक कदम पर हैं।
