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हल्दूचौड़ में दिल दहला देने वाली त्रासदी: प्रतिष्ठित व्यापारी दंपत्ति ने जीवनलीला की समाप्त—गोदाम के दो कमरों में फंदे पर झूलते मिले शव, क्षेत्र में मातम की लहर।

दर्पण न्यूज 24*7

हल्दूचौड़। मंगलवार रात हल्दूचौड़ क्षेत्र में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे और सन्नाटे में डूबो दिया। वर्षों से स्थानीय बाजार में हार्डवेयर और पेंट का व्यवसाय संभाल रहे दुमका ट्रेडर्स के मालिक रमेश दुमका (72) और उनकी पत्नी कमला दुमका (55) बुधवार सुबह अपने ही घर के नीचे बने गोदाम के दो अलग-अलग कमरों में फंदे से झूलते मिले। दृश्य इतना भयावह और हृदय विदारक था कि जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप उठी।

सुबह की शुरुआत बनी सबसे गहरा दर्द

बताया जा रहा है कि दंपत्ति अपने बेटे और बहू के साथ रहते थे। रोज़ की तरह मंगलवार रात सभी अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। लेकिन बुधवार सुबह जब बेटे और बहू ने देखा कि दंपत्ति अपने कमरे में नहीं हैं, तो बेचैनी बढ़ गई। घर में तलाश शुरू की गई, मगर कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
जब खोजते-खोजते वे नीचे बने गोदाम तक पहुंचे, तो अंदर जाते ही जो दृश्य सामने आया, उसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी—दोनों माता-पिता दो कमरों में अलग-अलग रस्सी के सहारे फंदे से झूल रहे थे।

बेटे-बहू की चीख-पुकार सुनते ही पड़ोसी भी मौके पर पहुंच गए। कुछ ही मिनटों में घर में कोहराम मच गया। पूरे क्षेत्र में मातम और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जांच में आर्थिक तंगी की आशंका, सुसाइड नोट नहीं मिला

सूत्रों के अनुसार, रमेश दुमका बीते काफी समय से आर्थिक तंगी और कर्ज़ के बोझ से परेशान बताए जा रहे थे। हालांकि, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ, जिससे पुलिस अन्य संभावित पहलुओं की भी गहराई से पड़ताल कर रही है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पड़ोसियों और जानकारों के मुताबिक, दुमका दंपत्ति का स्वभाव बेहद शांत, सरल और मिलनसार था। समाज में उनकी अच्छी छवि थी। ऐसे में उनके इस कदम ने सबको भीतर तक तोड़ दिया है और सवालों के बड़े घाव छोड़ दिए हैं।

घर में पसरा मातम, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

दोपहर बाद जैसे ही दंपत्ति के शव घर पहुंचे, परिजनों की चीखें पूरे माहौल को झकझोर गईं। रो-रोकर परिवार का हाल बेहाल था। आसपास के लोग भी उन्हें सांत्वना देते-देते खुद भी गम से भर उठे।

गमगीन माहौल में दोनों की शव यात्रा निकाली गई। स्थानीय व्यापारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी दंपत्ति को अंतिम विदाई देने पहुंचे। रानीबाग के चित्रशिला घाट पर पुत्र मोहित दुमका ने नम आंखों से अपने माता-पिता को मुखाग्नि दी।

अंतिम संस्कार के दौरान हर किसी की आंखें नम थीं। गम की लहर पूरे इलाके में स्पष्ट दिखाई दे रही थी—लोग यह स्वीकार ही नहीं कर पा रहे थे कि समाज का यह सम्मानित दंपत्ति अब इस दुनिया में नहीं रहा।


मुख्य बिंदु

  • गमगीन माहौल में दोनों शवों का अंतिम संस्कार
  • पुत्र मोहित दुमका ने दी मुखाग्नि
  • अंत्येष्टि में उमड़ा जन सैलाब
  • आर्थिक तंगी का संदेह, पुलिस की कई कोणों से जांच जारी

हल्दूचौड़ की यह घटना न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गहरा आघात है। दंपत्ति के इस फैसले ने कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं, जिनके उत्तर शायद समय ही दे पाए।

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