“जियारानी की जय-धुन से सरोबार हुआ रानीबाग, सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत झलक”
कत्यूरी वंशजों का उमड़ा सैलाब, गार्गी नदी में आस्था की डुबकी—रात्रि भर गूंजता रहा जियारानी की वीरगाथा का जागरण
दर्पण न्यूज 24/7
भीमताल। कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे कत्यूरी वंशजों ने रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम में अपनी आराध्य और कुलदेवी जियारानी की गुफा में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। ढोल-दमाऊं, नगाड़े, मसक बीन और तालियों की धुन के बीच ‘जय जिया रानी’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने गार्गी नदी में पवित्र स्नान के बाद देवी का ध्यान कर रात्रि भर जागरण किया, जिसमें जियारानी की वीरगाथा और उनके पराक्रम का भावपूर्ण बखान होता रहा।
कुमाऊं के रानीखेत, कोटाबाग, सल्ट, चौखुटिया, रामनगर के साथ गढ़वाल मंडल से भी अनेक कत्यूरी परिवार पहुंचे। उल्लेखनीय है कि गार्गी नदी किनारे चित्रशिला क्षेत्र आस्था और ऐतिहासिक विरासत का समृद्ध केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां ब्रह्मा, विष्णु और शिव की सम्मिलित शक्ति विद्यमान है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार सातवीं सदी में अयोध्या से आए सूर्यवंशी कत्यूरी शासकों का कुमाऊं और गढ़वाल के विशाल भूभाग पर शासन रहा।
स्थानीय लोगों की सराहनीय पहल।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रानीबाग के युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने हाई स्कूल में ठहरने और भोजन की व्यवस्था कर सेवा भाव की मिसाल पेश की। देर रात तक स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की मदद में जुटे रहे।
यह आयोजन न केवल आस्था का पर्व रहा, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं को संजोने का भी संदेश देता दिखा।
