








ऊंची पहाड़ियां बर्फ से लकदक, बारिश–हिमपात से ठिठुरन बढ़ी, किसानों-बागवानों के चेहरे खिले!
सीजन की पहली बर्फबारी से पर्वतीय अंचलों में ताजगी, पर्यटकों में उत्साह, खेती-किसानी को संजीवनी!
दर्पण न्यूज 24/7 | उत्तराखंड डेस्क
अल्मोड़ा/भीमताल/बागेश्वर/रामनगर/भिकियासैंण।
लंबे सूखे के बाद शुक्रवार को कुमाऊं के पर्वतीय अंचलों में मौसम ने करवट ली और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। करीब चार माह बाद हुई बारिश और हिमपात से जहां आम लोगों को राहत मिली, वहीं किसानों और बागवानों के मुरझाए चेहरे भी खिल उठे। पर्यटक स्थलों पर बर्फबारी से रौनक लौट आई और सैलानियों के चेहरों पर खासी मुस्कान नजर आई।
अल्मोड़ा जनपद में शुक्रवार दोपहर बाद मौसम अचानक बदला। जागेश्वर, कसारदेवी, शीतलाखेत, वृद्ध जागेश्वर, दूनागिरि समेत ऊंचाई वाले इलाकों में करीब एक घंटे तक बर्फबारी हुई। बाद में बारिश तेज होने से निचले हिस्सों में जमी बर्फ पिघलने लगी। धौलछीना और बदिवाकोट में बर्फ गिरी, जबकि रामगढ़ क्षेत्र में बर्फ जमने से पहाड़ियां सफेद चादर से ढक गईं।
बागेश्वर जिले के पिंडरघाटी क्षेत्र में भी शुक्रवार दोपहर से सीजन की पहली बर्फबारी हुई। बंदियाकोट, झूनी, लीती समेत ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की फुहारें पड़ीं।
नैनीताल जिले के रामगढ़, मुक्तेश्वर, धानाचूली, मनाघेर, भीड़ापानी, हरिनगर समेत आसपास के क्षेत्रों में शाम तक 5–6 इंच तक बर्फ जम चुकी थी और लगातार हिमपात जारी रहा। कई जगह मार्गों पर वाहन फंस गए, जिसके चलते लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी मशीनें तैनात कर बर्फ हटाने का काम शुरू किया। विधायक राम सिंह कैड़ा ने भी दूरभाष पर लोनिवि अधिकारियों से वार्ता कर जेसीबी मंगवाई और फंसे वाहनों को निकलवाया।
भिकियासैंण नगर पंचायत क्षेत्र में दिनभर रिमझिम बारिश होती रही। बारिश के चलते ठंड में बढ़ोतरी दर्ज की गई और लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा।
मौसम विभाग के अनुसार, बारिश और हिमपात से तापमान में भारी गिरावट आई है। अधिकतम तापमान करीब 8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया, जिससे कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है।
लंबे समय बाद हुई बारिश को किसान और बागवान खेती-किसानी के लिए संजीवनी मान रहे हैं। काश्तकारों का कहना है कि यह बारिश गेहूं और अन्य रबी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। सेब सहित अन्य फलों की बागवानी के लिए भी इसे लाभकारी माना जा रहा है। साथ ही जंगलों में बढ़ते अग्निकांड के खतरे को लेकर वन विभाग को भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
उधर रामनगर में बारिश के चलते बाजार में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। वसंत पंचमी के दौरान लगने वाला मेला भी ठंडा पड़ गया। दुकानदारों का कहना है कि बारिश से उनका सामान खराब हो गया और हजारों रुपये का नुकसान हुआ।
कुल मिलाकर, पर्वतीय क्षेत्रों में हुई इस पहली बर्फबारी और बारिश ने जहां ठिठुरन बढ़ा दी है, वहीं लंबे सूखे से जूझ रहे किसानों-बागवानों और पर्यटकों के लिए यह मौसम खुशियों की सौगात बनकर आया है।
