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एक राष्ट्र–एक शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग, राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन!
शिक्षा में समान अवसर और राष्ट्रीय मानकीकरण कानून बनाने की उठी आवाज!
दर्पण न्यूज 24/7लालकुआं। देश में शिक्षा व्यवस्था को समान और संतुलित बनाने की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर उठने लगी है। इसी क्रम में राष्ट्रहित एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नागरिकों द्वारा महामहिम राष्ट्रपति को पंजीकृत ज्ञापन भेजकर “एक राष्ट्र–एक शिक्षा” नीति लागू करने की मांग की गई है। ज्ञापन तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान बहु-बोर्डीय शिक्षा प्रणाली के कारण देश के विद्यार्थियों के बीच अवसरों की समानता प्रभावित हो रही है। अलग-अलग पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना के चलते सामाजिक एवं आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है, जिससे प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन भी प्रभावित हो रहा है।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 एवं 21A का हवाला देते हुए शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। साथ ही नीति-निर्देशक तत्वों के तहत राज्य की जिम्मेदारी बताते हुए शिक्षा क्षेत्र में असमानताओं को कम करने की मांग की गई।
शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख चुनौतियां
ज्ञापन में शिक्षा प्रणाली से जुड़ी प्रमुख समस्याएं भी चिन्हित की गई हैं—
पाठ्यक्रमों में असमानता
मूल्यांकन प्रणाली में अंतर
निजी स्कूलों की अनियंत्रित फीस
शिक्षा का बढ़ता व्यवसायीकरण
सामाजिक एवं आर्थिक विषमता
राष्ट्रीय शिक्षा मानकीकरण ढांचे का प्रस्ताव
ज्ञापन में केंद्र सरकार से राष्ट्रीय शैक्षिक मानकीकरण अधिनियम अथवा समान ढांचा तैयार करने की मांग करते हुए सुझाव दिए गए हैं—
कक्षा 1 से विश्वविद्यालय स्तर तक न्यूनतम समान राष्ट्रीय पाठ्यक्रम
देशभर में समान परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली
निजी विद्यालयों के लिए शुल्क नियामक तंत्र
संसाधनों का समान वितरण
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए समान अवसर
संवैधानिक एवं नैतिक मूल्य आधारित शिक्षा
चरणबद्ध लागू करने का सुझाव
ज्ञापन में राष्ट्रीय शिक्षा मानकीकरण आयोग के गठन, समान पाठ्यक्रम निर्माण तथा चरणबद्ध क्रियान्वयन एवं निगरानी व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
ज्ञापन प्रेषकों का कहना है कि समान शिक्षा व्यवस्था लागू होने से देश के प्रत्येक छात्र को बराबरी का अवसर मिलेगा और शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी एवं न्यायसंगत बन सकेगी।

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