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रूसी तेल पर अमेरिका की छूट को लेकर विवाद: सरकार बोली—भारत किसी की अनुमति से नहीं खरीदता तेल!
दर्पण न्यूज 24/7 नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दिए जाने को लेकर विपक्ष की आलोचना पर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कड़ा जवाब दिया। सरकार ने साफ कहा कि भारत ने कभी भी रूस से तेल खरीदने के लिए किसी देश की अनुमति पर निर्भरता नहीं रखी है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत की नीति हमेशा से ऊर्जा जरूरतों को विविध स्रोतों से पूरा करने की रही है। अमेरिका के विरोध और प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल की आपूर्ति भारत को जारी रही और इसे पूरी तरह कभी बंद नहीं किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी महीने में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। फरवरी में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत बढ़ा। फरवरी के अंत तक कुल आयातित कच्चे तेल में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत रही।
अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार देश के हर परिवार को यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि भारत में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में देश में एक भी पेट्रोल पंप सूखा नहीं पड़ा है। जिसे कुछ लोग संकट बता रहे हैं, वह दरअसल हमारी तैयारी का प्रमाण है।”
सरकार ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी छूट केवल प्रक्रिया को आसान बनाती है, लेकिन भारत की ऊर्जा नीति को तय नहीं करती। भारत की नीति तीन प्रमुख आधारों—सुलभता, उपलब्धता और स्थिरता—पर आधारित है, ताकि हर भारतीय परिवार तक ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति बनी रहे।
विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत जहां भी सस्ता और उपलब्ध तेल मिलेगा, वहीं से खरीद करेगा। “भारत ने कभी भी रूसी तेल खरीदने के लिए किसी देश की अनुमति का इंतजार नहीं किया है,” उन्होंने कहा।
इस बीच सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सार्वजनिक और निजी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। सरकार ने कहा है कि रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों में करने के बजाय एलपीजी उत्पादन में करें।
सूत्रों के मुताबिक हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL), जिन्होंने दिसंबर के बाद से रूसी तेल नहीं खरीदा था, अब फिर से बाजार में सक्रिय हो गई हैं। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज भी रूसी तेल की नई खेप लेने की तैयारी कर रही है।
गौरतलब है कि भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 40 से 50 प्रतिशत आपूर्ति पश्चिम एशिया से आती है। ऐसे में वैश्विक संकट के समय रूस जैसे वैकल्पिक स्रोत भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

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