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पांच साल बीते, सवाल वही: आखिर किस दिशा में हुआ विकास?

दर्पण न्यूज 24×7 विशेष

लालकुआं!

वर्ष 2022 में लालकुआं विधानसभा की जनता ने बड़े विश्वास और उम्मीदों के साथ अपने जनप्रतिनिधि को विकास की बागडोर सौंपी थी। लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन पंचवर्षीय कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और आज भी जनता के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है—”आखिर किस दिशा में हुआ विकास?”

लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में जनभावनाओं की पड़ताल करें तो तस्वीर उत्साहजनक नहीं दिखती। क्षेत्र की अनेक सड़कें आज भी गड्ढों में तब्दील हैं। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कई संपर्क मार्ग ऐसे हैं जहां सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पतालों में आज भी विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव बना हुआ है। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। जनता पूछ रही है कि जब अस्पताल भवन तैयार हैं तो फिर स्वास्थ्य सुविधाएं धरातल पर क्यों नहीं उतर पाईं?

जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना भी क्षेत्र के अनेक गांवों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। कई स्थानों पर पाइप लाइनें बिछीं, लेकिन घरों तक नियमित और शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना अधूरा ही बना हुआ है।

वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ते सड़क हादसे लोगों की चिंता का विषय बने हुए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मानकों के अनुरूप कट, सर्विस रोड और सुरक्षा व्यवस्थाओं का अभाव होने के कारण हाईवे कई स्थानों पर दुर्घटना क्षेत्र में तब्दील हो चुका है। आए दिन होने वाली दुर्घटनाएं विकास के दावों पर सवाल खड़े करती हैं।

रोजगार का मुद्दा भी क्षेत्र के युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। उद्योगों और स्थानीय रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा पलायन को मजबूर हैं। चुनावी मंचों से किए गए रोजगार संबंधी वादे आज भी अधूरे दिखाई देते हैं।

बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने का मुद्दा भी वर्षों से क्षेत्रीय राजनीति का केंद्र रहा है। हजारों लोगों की उम्मीदें इस मुद्दे से जुड़ी हैं, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस परिणाम आज भी जनता की प्रतीक्षा में हैं।

जनता के बीच चर्चा है कि यदि मूलभूत सुविधाओं की स्थिति यही रही तो वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला नहीं होगा, बल्कि जनता के धैर्य और जनप्रतिनिधियों के कार्यों की परीक्षा भी होगा। मतदाता इस बार विकास के दावों और जमीनी हकीकत का तुलनात्मक मूल्यांकन करते हुए मतदान कर सकते हैं।

लालकुआं की जनता आज जवाब चाहती है। वह जानना चाहती है कि पांच वर्षों में उसकी जिंदगी को आसान बनाने वाले कौन से बड़े परिवर्तन हुए? सड़क, पानी, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे बुनियादी सवालों के उत्तर आखिर कब मिलेंगे?

2027 नजदीक है। ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि लालकुआं की जनता अब नारों से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले विकास से अपना फैसला करेगी। आने वाला चुनाव जनता की उम्मीदों, नाराजगी और जनभावनाओं का सबसे बड़ा आईना साबित हो सकता है।