








जिस मंजर को देख कांपती है लोगों की रूह, वहां बेखौफ पहुंचता है ये जुनूनी प्रकृति प्रेमी!
जानें नौकुचियाताल के चनौती गांव निवासी तरुण भट्ट उर्फ पप्पू के इस जुनून का क्या है राज?
सैकड़ों सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुका है नौकुचियाताल का यह ‘स्नेक मैन’, लोगों के लिए डर का मंजर उसके लिए बन जाता है जिम्मेदारी
दर्पण न्यूज 24/7 संवाददाता।
भीमताल। जिस मंजर की कल्पना मात्र से कई लोगों की रूह कांप उठती है, जिस वक्त घर के आंगन या कमरे में अचानक सांप दिखाई देने पर अफरा-तफरी मच जाती है, उसी मंजर के बीच नौकुचियाताल के चनौती गांव निवासी तरुण भट्ट उर्फ पप्पू बेखौफ पहुंच जाते हैं। उनके हाथ में न कोई हथियार होता है और न ही चेहरे पर डर। सामने सांप होता है और तरुण का लक्ष्य सिर्फ एक—उसे बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना।
आखिर ऐसा क्या है जो तरुण को सांपों के इतने करीब जाने का साहस देता है? क्या यह सिर्फ शौक है, जुनून है या फिर वन्यजीवों के प्रति गहरा लगाव? क्षेत्र में उनकी कहानी सुनने वाले लोगों के मन में यही सवाल उठता है। पिछले कई वर्षों से सांपों के रेस्क्यू में जुटे तरुण अब तक सैकड़ों सांपों को सुरक्षित पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ चुके हैं। इसी वजह से क्षेत्र में उनकी पहचान ‘पप्पू स्नेक मैन’ के रूप में बन गई है।
फोन की घंटी बजते ही शुरू हो जाता है रेस्क्यू अभियान!
बारिश का मौसम आते ही सांपों के रिहायशी इलाकों में निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कभी घर के कमरे में, कभी आंगन में, तो कभी खेत या गोठ में सांप दिखाई दे जाता है। सांप देखते ही परिवार के लोगों में भय का माहौल बन जाता है। ऐसे समय में मदद के लिए कई बार तरुण को फोन किया जाता है।
सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। जिस जगह जाने से लोग डरते हैं, वहां तरुण बेहद सावधानी के साथ पहुंचते हैं और सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने का प्रयास करते हैं। उनका मकसद सांप को मारना नहीं, बल्कि उसे आबादी से सुरक्षित निकालकर उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना होता है।
सैकड़ों रेस्क्यू, फिर भी कम नहीं हुआ जुनून!
तरुण के लिए सांपों का रेस्क्यू कोई एक-दो दिन का शौक नहीं है। वर्षों से वह इस काम में जुटे हुए हैं। अब तक वह सैकड़ों सांपों को रेस्क्यू कर चुके हैं। हर बार जोखिम अलग होता है, परिस्थितियां अलग होती हैं और सांप का व्यवहार भी अलग हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद तरुण पीछे नहीं हटते।
उनका कहना है कि सांपों के प्रति लोगों में डर स्वाभाविक है, लेकिन डर के कारण उन्हें मार देना समाधान नहीं है। सांप भी पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका है।
खेतों के ‘अनदेखे प्रहरी’ हैं सांप!
तरुण के मुताबिक सांप केवल डर पैदा करने वाला जीव नहीं है। खेतों और ग्रामीण इलाकों में चूहों की संख्या नियंत्रित करने में सांप महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूहे फसलों और अनाज को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि सांप प्राकृतिक रूप से उनकी संख्या नियंत्रित करते हैं। इस तरह सांप सीधे तौर पर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।
उनका मानना है कि यदि हर सांप को खतरा समझकर मार दिया जाए तो इसका असर प्रकृति के पूरे चक्र पर पड़ सकता है। इसलिए लोगों को सांप दिखाई देने पर संयम बरतना चाहिए और उसे खुद पकड़ने या मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यूअर अथवा वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
न लालच, न इनाम… फिर क्यों करते हैं यह काम?
तरुण के इस काम की सबसे खास बात यह है कि वह इसे किसी लालच से नहीं जोड़ते। उनके लिए किसी परिवार को सांप के डर से राहत दिलाना और एक जीव की जान बचाना ही सबसे बड़ी संतुष्टि है। यही सोच उन्हें बार-बार उस जगह पहुंचाती है जहां जाने से सामान्य व्यक्ति भी घबरा सकता है।
एक तरफ लोगों की नजर में सांप खतरे का पर्याय है तो दूसरी तरफ तरुण उसे प्रकृति की व्यवस्था का हिस्सा मानते हैं। शायद यही नजरिया उनके भीतर के डर को जिम्मेदारी में बदल देता है।
लोगों से अपील—खुद पकड़ने की कोशिश न करें!
तरुण लोगों से अपील करते हैं कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराकर उसे मारने की कोशिश न करें। सांप को खुद पकड़ना भी बेहद जोखिम भरा हो सकता है। कई बार सामान्य दिखने वाला सांप भी काट सकता है और उसकी पहचान बिना विशेषज्ञ जानकारी के करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में सुरक्षित तरीका यही है कि लोगों को सांप से दूरी बनाए रखनी चाहिए और प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यूअर या संबंधित वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
डर के उस पार खड़ा है ‘स्नेक मैन’!
जिस मंजर को देखकर आम आदमी पीछे हट जाता है, तरुण उसी मंजर की ओर कदम बढ़ाते हैं। सैकड़ों सांपों के रेस्क्यू के बाद भी उनका यह जुनून थमा नहीं है। नौकुचियाताल के चनौती गांव से शुरू हुई उनकी यह पहचान अब क्षेत्र में ‘पप्पू स्नेक मैन’ के नाम से जानी जाती है।
उनकी कहानी सिर्फ सांप पकड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच की कहानी है जिसमें डर के बजाय समझ, हिंसा के बजाय संरक्षण और खतरे के बजाय जिम्मेदारी को महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि जब कहीं सांप निकलता है और लोग घबराकर एक-दूसरे का चेहरा देखते हैं, तो अक्सर एक ही नाम याद आता है—तरुण भट्ट उर्फ पप्पू, यानी क्षेत्र का ‘स्नेक मैन’।
