








विकास के दावों की हवा निकाल रहा ये समाजसेवी युवा!
200 मीटर की बदहाल सड़क बनी विकास के दावों का आईना, ग्रामीणों की मांगों को लेकर धरने पर बैठे कार्तिक बमेटा
हल्दूचौड़।
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्र में सियासी सरगर्मियां तेज हैं। दर्जनों नेता दावेदारी ठोक रहे हैं और गांव-गांव विकास की बयार बहाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन बमेटा बंगर केशव की बदहाल 200 मीटर सड़क ने इन तमाम दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है।
इसी बदहाली के खिलाफ अब युवा समाजसेवी एवं ग्राम प्रधान जीवंती बमेटा के पुत्र और प्रधान प्रतिनिधि कार्तिक बमेटा ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर उन्होंने धरना शुरू कर जिम्मेदारों से जवाब मांगना शुरू कर दिया है।
तेल डिपो से हरिपुर बच्ची लिंक मार्ग पर सरकारी देशी शराब की दुकान के आगे से स्टोन क्रेशरों की ओर जाने वाले भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही ने करीब 200 मीटर सड़क को गड्ढों में तब्दील कर दिया है। बरसात के बाद सड़क की हालत और भी बदतर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही का असर सड़क पर साफ दिखाई दे रहा है, लेकिन जिम्मेदार अब तक ठोस कार्रवाई से दूर हैं।
कार्तिक बमेटा का धरना सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों की ओर से पक्की सड़क, सोलर लाइट, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, फलदार पौधों का रोपण, जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग, सड़क बनने के बाद नियमित सफाई व पानी का छिड़काव तथा सुरक्षा के लिए सोलर कैमरे लगाने जैसी मांगें भी उठाई गई हैं।
दावेदारों की भीड़, मगर सड़क पर सन्नाटा!
सबसे बड़ा सवाल 2027 की चुनावी तैयारियों को लेकर है। क्षेत्र में टिकट की दौड़ में शामिल नेता विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। कोई सड़कें चमकाने की बात कर रहा है तो कोई गांवों की तस्वीर बदलने का संकल्प जता रहा है।
लेकिन जब एक गांव की महज 200 मीटर सड़क गड्ढों में तब्दील होकर ग्रामीणों की परेशानी का कारण बनी हुई है, तब चुनावी दावेदारों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
कार्तिक बमेटा का धरना फिलहाल उन तमाम दावों के सामने एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है—अगर विकास गांव की चौखट तक पहुंच चुका है तो फिर यह सड़क बदहाल क्यों है?
युवा ने उठाया सवाल, अब जवाब की बारी
कार्तिक बमेटा ने धरने के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि सिर्फ चुनाव के समय विकास की बातें करने से गांव की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। इसके लिए जमीन पर उतरकर आवाज उठानी होगी।
अब निगाह प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर है। सवाल यह भी है कि क्या कार्तिक के धरने के बाद इस 200 मीटर सड़क की तस्वीर बदलेगी या फिर विकास के दावे चुनावी नारों की तरह हवा में ही तैरते रहेंगे?
