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जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव सीधे जनता से कराने की मांग!

पंचायती राज अधिनियम में संशोधन के लिए मंत्री को ज्ञापन, खरीद-फरोख्त और दलबंदी पर उठाए सवाल!

दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।

उत्तराखंड में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव सीधे जनता से कराने की मांग तेज हो गई है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद बल्लभ भट्ट और समाजसेवी व आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत सिंह गोनिया ने इस संबंध में पंचायती राज मंत्री को ज्ञापन भेजकर उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम में संशोधन की मांग की है। ज्ञापन तहसील लालकुआं के माध्यम से भेजा गया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख का चुनाव निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से होता है। आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण कई बार खरीद-फरोख्त, दलबंदी और भ्रष्टाचार जैसी स्थितियों को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में इन दोनों पदों का चुनाव ग्राम प्रधान की तर्ज पर सीधे जनता से कराने के लिए कानून में संशोधन किया जाना चाहिए।

पहले भी उठ चुका है मुद्दा!

ज्ञापन में बताया गया है कि इस मांग को लेकर 13 मई 2025 को तत्कालीन पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज को भी विस्तृत पत्र दिया गया था। उस समय केंद्रीय पंचायती राज मंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिए जाने का उल्लेख भी किया गया है। हालांकि, ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि इसके बाद मामला आगे ठोस स्तर पर नहीं बढ़ सका।

ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि राज्य सरकार की ओर से केंद्र को औपचारिक प्रस्ताव भेजने और मामले में प्रभावी अनुवर्तन की जरूरत है। इसी को लेकर अब नवनियुक्त पंचायती राज मंत्री से निर्णायक पहल की अपेक्षा जताई गई है।

ग्राम सभा को भी मिले ज्यादा अधिकार!

ज्ञापनकर्ताओं ने केवल जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के प्रत्यक्ष चुनाव की मांग नहीं की है, बल्कि ग्राम सभा को अधिक अधिकार देने के लिए भी पंचायती राज कानून में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायती राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य सत्ता का विकेंद्रीकरण और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसलिए निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्राम सभा की भूमिका को और मजबूत किया जाना चाहिए।

प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग!

ज्ञापन में पंचायती राज मंत्री से केंद्रीय स्तर पर पत्राचार करने के साथ ही संशोधन की प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि इससे जनता को यह जानकारी मिल सकेगी कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर किस स्तर तक आगे बढ़ी है।

उनका तर्क है कि बदलते समय के अनुरूप पंचायती राज व्यवस्था में भी सुधार जरूरी है। यदि मौजूदा अप्रत्यक्ष चुनाव व्यवस्था में भ्रष्टाचार और राजनीतिक जोड़-तोड़ की आशंकाएं बनी रहती हैं तो जनता को सीधे चुनाव के माध्यम से जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख चुनने का अधिकार देने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

अब नजर इस बात पर है कि पंचायती राज विभाग इस मांग को किस स्तर तक आगे बढ़ाता है और क्या राज्य सरकार इस संबंध में केंद्र को औपचारिक प्रस्ताव भेजने की पहल करती है।

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