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सात दिन की जांच 19 दिन बाद भी अधूरी, यूसीएफ की खुदाई पर सवाल बरकरार!

हल्दूचौड़ में ध्वस्तीकरण के दौरान जमीन की गहराई तक खुदाई के आरोप , 7 सितंबर को बनी थी कमेटी, एक सप्ताह में रिपोर्ट के थे निर्देश!

लालकुआं: हल्दूचौड़ स्थित उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स में भवन ध्वस्तीकरण के दौरान जमीन की गहराई तक खुदाई किए जाने के आरोपों की जांच अब खुद सवालों के घेरे में है। सात सितंबर को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 26 सितंबर तक जांच पूरी नहीं हो सकी है।

यूसीएफ के महाप्रबंधक त्रिभुवन रावत ने मामले की जांच के लिए परियोजना अधिकारी त्रिलोचन पाठक की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। इसमें नैनीताल की जिला प्रबंधक प्रेमा हर्बोला, सहायक अभियंता शुभम बिष्ट, अवर अभियंता मानवेंद्र सिंह और अकाउंटेंट दीपक तिवारी शामिल हैं।

निर्देश एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के थे, लेकिन तय समयसीमा बीतने के बावजूद जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच में ऐसी क्या वजह है कि 19 दिन बाद भी रिपोर्ट पूरी नहीं हो पाई? क्या तकनीकी जांच बाकी है, दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं या किसी अन्य कारण से प्रक्रिया लंबी खिंच रही है?

मामले में प्रशासन भी नजर बनाए हुए है। एसडीएम लालकुआं रेखा कोहली के मुताबिक प्रशासन की ओर से भी रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजी जाएगी।

शिकायतों का केंद्र यह है कि भवन ध्वस्तीकरण और मलबा हटाने की आड़ में जमीन की गहराई तक खुदाई क्यों की गई। हालांकि आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी, लेकिन जांच में देरी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

अब असली परीक्षा जांच कमेटी की है। क्या रिपोर्ट में ध्वस्तीकरण से लेकर खुदाई और मलबे के निस्तारण तक हर पहलू की पड़ताल होगी? क्या मौके की वास्तविक स्थिति, तकनीकी मानकों और संबंधित रिकॉर्ड को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा? और सबसे अहम—क्या जिम्मेदारी तय करने वाली निष्पक्ष रिपोर्ट सामने आएगी या फाइल जांच के नाम पर लंबी होती जाएगी?

यूसीएफ को अब यह स्पष्ट करना होगा कि एक सप्ताह में पूरी होने वाली जांच 19 दिन बाद भी अधूरी क्यों है और रिपोर्ट के लिए आखिर और कितना इंतजार करना होगा।

उत्तराखंड