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उत्तराखंड हाईकोर्ट के दो महत्वपूर्ण फैसले: 22 करोड़ के कथित गबन पर सीबीआई से मांगी राय, खानपुर फायरिंग केस अब जनहित याचिका में!

पुलिस जांच पर सवाल से लेकर कानून-व्यवस्था तक—हाईकोर्ट ने दिए अहम न्यायिक निर्देश!

नैनीताल। दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण मामलों में ऐसे न्यायिक निर्देश दिए, जिनका सीधा संबंध जांच की निष्पक्षता, जवाबदेही, सार्वजनिक धन और कानून-व्यवस्था से है। एक ओर उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े 22 करोड़ रुपये के कथित गबन और भ्रष्टाचार के मामले में अदालत ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को अस्पष्ट और सतही माना तथा सीबीआई से विस्तृत राय मांगी। दूसरी ओर खानपुर विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन से जुड़े फायरिंग प्रकरण को गंभीर कानून-व्यवस्था का मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान वाले मामले को जनहित याचिका में बदलने के निर्देश दिए।

22 करोड़ के कथित गबन मामले में पुलिस रिपोर्ट पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी!

उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ धीरज भंडारी की शिकायत पर दाखिल याचिका में करीब 22 करोड़ रुपये के कथित गबन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। मामले में सीबीआई और बीसीसीआई भी पक्षकार हैं।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने पुलिस की ओर से प्रस्तुत जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया। पुलिस उपाधीक्षक, सर्किल डोईवाला, देहरादून अनिल कुमार जोशी की रिपोर्ट में ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर किसी अनियमितता के नहीं पाए जाने की बात कही गई थी।

लेकिन हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट को अस्पष्ट और सतही माना। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि 15 नवंबर 2024 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दी गई मूल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर रिपोर्ट में ठोस चर्चा और जांच का पर्याप्त विवरण नहीं है।

सीबीआई अब पूरे रिकॉर्ड की करेगी समीक्षा!

हाईकोर्ट ने सीबीआई को याचिका के पूरे रिकॉर्ड, मूल शिकायत और प्रतिवादियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का अध्ययन कर आरोपों पर विस्तृत राय सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी। इस आदेश के बाद मामले में सीबीआई की राय महत्वपूर्ण न्यायिक दस्तावेज के रूप में सामने आएगी।


खानपुर फायरिंग मामला: हाईकोर्ट ने माना सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय!

दूसरे महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने खानपुर विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन से जुड़े फायरिंग प्रकरण पर भी अहम आदेश दिया है।

26 जनवरी 2025 को हुई इस घटना के बाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। अब न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने इसे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान वाले मामले को जनहित याचिका में परिवर्तित करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने रजिस्ट्री को पूरा रिकॉर्ड जनहित याचिकाओं की सुनवाई करने वाली उपयुक्त पीठ के समक्ष रखने को कहा है। हालांकि यह प्रक्रिया मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति के अधीन रहेगी।

न्यायालय मित्र की भी नियुक्ति!

मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष गर्ग को एमिकस क्यूरी यानी न्यायालय मित्र नियुक्त किया गया है। राज्य की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट सहित पूरा पेपर बुक उन्हें एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।


हाईकोर्ट के दोनों आदेश क्यों महत्वपूर्ण?

इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट के आदेशों का व्यापक महत्व है। पहले मामले में अदालत ने जांच की गुणवत्ता और शिकायत के आरोपों की वास्तविक पड़ताल को केंद्र में रखा है, जबकि दूसरे मामले में सार्वजनिक स्थान पर हुई राजनीतिक टकराव से जुड़ी फायरिंग को केवल व्यक्तिगत विवाद न मानकर सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के व्यापक संदर्भ में देखा गया है।

एक मामले में अब सीबीआई की सीलबंद राय का इंतजार है, जबकि दूसरे में मामला जनहित याचिका के रूप में आगे बढ़ने की दिशा में है।

यानी हाईकोर्ट के इन दोनों महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेपों ने एक साथ जांच की जवाबदेही और सार्वजनिक सुरक्षा के सवाल को केंद्र में ला दिया है।

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