

किच्छा-सिरौलीकलां में कल खुलेगा सियासी पिटारा, बेहड़-शुक्ला की ताकत का भी होगा इम्तिहान!
नगरपालिका की मतगणना पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, कल होगी वोटों की गिनती अब नतीजों पर टिकीं सियासी निगाहें!
किच्छा। करीब दो सप्ताह से स्ट्रांग रूम में बंद किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव के मतपत्र आखिरकार 7 अक्टूबर को बाहर आएंगे। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद दोनों निकायों की मतगणना का रास्ता साफ हो गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने भी बुधवार सुबह आठ बजे से मतगणना कराने का संशोधित कार्यक्रम जारी कर दिया है।
22 सितंबर को मतदान के बाद जिस चुनाव का फैसला जल्द सामने आ जाना था, वह कानून-व्यवस्था और मतगणना टलने के कारण अदालतों तक पहुंच गया। पहले हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर मतगणना कराने का निर्देश दिया, लेकिन इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शीर्ष अदालत ने सीधे 7 अक्टूबर को मतगणना कराने का आदेश दे दिया।
अदालत की सख्ती से बदला पूरा चुनावी परिदृश्य !
मतगणना टालने के पीछे सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था का हवाला दिया गया था। मतदान के बाद किच्छा में विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के समर्थकों के बीच तनाव और विवाद की स्थिति बनी थी। इसी के बाद मतगणना को लेकर असमंजस पैदा हुआ।
लेकिन अब अदालत के आदेश ने तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह सवाल भी सामने आया कि यदि नगर पालिका जैसे स्थानीय चुनाव की मतगणना नहीं कराई जा सकती तो भविष्य में विधानसभा चुनावों में वोटों की गिनती कैसे होगी। अदालत की यह टिप्पणी मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है।
अब प्रशासन के सामने स्पष्ट निर्देश हैं और प्रत्याशियों के सामने इंतजार की घड़ी खत्म होने वाली है।
बेहड़ बनाम शुक्ला—स्थानीय सियासत का शक्ति परीक्षण !
किच्छा की राजनीति में तिलकराज बेहड़ और राजेश शुक्ला लंबे समय से दो प्रमुख राजनीतिक ध्रुवों के रूप में देखे जाते हैं। ऐसे में नगर पालिका चुनाव के नतीजे केवल अध्यक्ष और सभासद पदों के परिणाम नहीं होंगे, बल्कि दोनों खेमों के स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी नई बहस को जन्म देंगे।
हालांकि नगर पालिका चुनाव का परिणाम सीधे विधानसभा चुनाव का परिणाम नहीं माना जा सकता, लेकिन स्थानीय निकाय में किस राजनीतिक धड़े को कितने वार्डों में समर्थन मिला, अध्यक्ष पद पर कौन सफल रहा और किन क्षेत्रों में किस खेमे की पकड़ दिखाई दी—ये आंकड़े आने वाले समय में किच्छा की राजनीति के समीकरणों की चर्चा का आधार जरूर बन सकते हैं।
यही वजह है कि कल की मतगणना पर सिर्फ प्रत्याशियों की ही नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों की भी नजर है।
किसके पक्ष में कितना जनसमर्थन? कल खुलेगा राज !
किच्छा और सिरौलीकलां में मतदान 22 सितंबर को हो चुका है। तब से मतपेटियां स्ट्रांग रूम में सुरक्षित हैं और प्रत्याशियों की राजनीतिक बेचैनी लगातार बढ़ती रही। अब 7 अक्टूबर को मतगणना शुरू होते ही सबसे पहले सभासद पदों के वार्डवार रुझान सामने आएंगे और उसके बाद अध्यक्ष पद की तस्वीर साफ होगी।
किच्छा में असली सवाल यही होगा कि नगर की जनता ने किस राजनीतिक धड़े पर भरोसा जताया है। क्या स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ निर्णायक बनी या बड़े राजनीतिक चेहरों का प्रभाव मतदाताओं पर भारी रहा—इसका जवाब मतपेटियों से निकलेगा।
सिरौलीकलां के लिए भी यह चुनाव अहम है, क्योंकि नवगठित नगर पालिका के राजनीतिक नेतृत्व की पहली तस्वीर इसी मतगणना से सामने आएगी।
अब अदालत नहीं, मतपेटियां बोलेंगी
किच्छा-सिरौलीकलां चुनाव में पिछले दिनों सियासी बयानबाजी, प्रशासनिक फैसले और अदालतों के आदेश सुर्खियों में रहे। लेकिन अब अंतिम फैसला किसी नेता के बयान से नहीं, बल्कि मतपेटियों से निकलेगा।
7 अक्टूबर की मतगणना यह तय करेगी कि स्थानीय जनता ने किसे अपना प्रतिनिधित्व सौंपा है। इसके साथ ही किच्छा की स्थानीय राजनीति में बेहड़ और शुक्ला खेमों के बीच प्रभाव को लेकर भी नई राजनीतिक चर्चा शुरू होना तय है।
फिलहाल सभी की निगाहें स्ट्रांग रूम पर हैं। कल ताले खुलेंगे, मतपत्र बाहर आएंगे और किच्छा-सिरौलीकलां की जनता का फैसला सामने होगा।
