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क्रिकेट से तैराकी तक का सफर, देहरादून में जीता स्वर्ण पदक।

प्रमोद बमेटा | देहरादून

कभी व्हीलचेयर क्रिकेट की पिच पर अपने हौसले का परिचय देने वाले हल्दूचौड़ निवासी भुवन चंद्र गुणवंत ने अब पानी की लहरों को भी अपनी जीत का गवाह बना दिया है। देहरादून में 3 से 5 अक्टूबर तक आयोजित मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी, खेल महाकुंभ-2026 की राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता में भुवन ने स्वर्ण पदक जीतकर साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती।

भुवन का खेल सफर किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है। उन्होंने व्हीलचेयर क्रिकेट से शुरुआत की और अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर उत्तराखंड राज्य व्हीलचेयर क्रिकेट टीम की कप्तानी तक की। इसके बाद उन्होंने व्हीलचेयर बैडमिंटन, पैरा लॉन बॉल और एथलेटिक्स की विभिन्न स्पर्धाओं में भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग किया। शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

हर खेल ने भुवन को एक नई चुनौती दी और उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदल दिया। वर्ष 2026 में गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय पैरा लॉन बॉल प्रतियोगिता में उन्होंने ट्रिपल्स स्पर्धा में रजत और डबल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए गुवाहाटी स्थित आरएसएस केंद्र में उनका सम्मान भी किया गया। अब तैराकी में जीता गया स्वर्ण पदक उनके संघर्ष और सफलता की कहानी में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ रहा है।

भुवन की उड़ान केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं है। वह योग गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने योगगुरु स्वामी रामदेव के साथ योगासन और प्राणायाम का प्रदर्शन किया था। 27 फरवरी 2023 को इंडिया टीवी के लाइव योग कार्यक्रम में उन्होंने हिस्सा लिया। वहीं, 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हैदराबाद स्थित कान्हा शांति वनम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए योग और प्राणायाम का प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने शीर्षासन कर अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया।

भुवन की संवेदनशीलता उन्हें केवल खिलाड़ी नहीं, बल्कि दूसरों के लिए उम्मीद की किरण भी बनाती है। वह अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों को खेलों से जुड़ने और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए लगातार प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि यदि प्रतिभा को अवसर, मार्गदर्शन और उचित प्रशिक्षण मिले, तो कोई भी खिलाड़ी अपनी पसंद की विधा में आगे बढ़ सकता है। मतदाता आइकॉन के रूप में भी वह मतदान के प्रति जागरूकता फैलाने वाले कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करते रहे हैं।

तैराकी में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भुवन ने कहा कि यह उपलब्धि निरंतर अभ्यास और मेहनत का परिणाम है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, प्रशिक्षकों, साथी खिलाड़ियों, आयोजकों और उन सभी लोगों को दिया, जिन्होंने उनके सफर में उनका साथ दिया।

भुवन की कहानी केवल पदकों की कहानी नहीं है। यह उस जज्बे की कहानी है, जो हार मानना नहीं जानता। व्हीलचेयर क्रिकेट की कप्तानी से लेकर पैरा लॉन बॉल और अब तैराकी के स्वर्ण पदक तक उनका सफर बताता है कि खेल बदल सकते हैं, मैदान बदल सकते हैं, लेकिन यदि हौसला कायम रहे तो मंजिलें लगातार करीब आती रहती हैं।

भुवन चंद्र गुणवंत की उपलब्धियां उन तमाम दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए संदेश हैं, जो अपनी परिस्थितियों से जूझते हुए सपने देखते हैं। उनका जीवन कहता है कि शरीर की सीमाएं सपनों को नहीं रोक सकतीं—जरूरत केवल विश्वास, मेहनत और आगे बढ़ते रहने की है।

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