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युवाओं के नवाचार से बदलेगी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था, पलायन रोकने पर जोर!

ग्राफिक एरा में राज्य स्तरीय सेमिनार का समापन, जल संरक्षण, हरित ऊर्जा, पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर विशेषज्ञों ने रखे सुझाव!

दर्पण न्यूज 24/7| हल्द्वानी, 9 अक्टूबर।

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए युवाओं के नवाचार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को विकास की धुरी बनाने पर जोर दिया गया। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के हल्द्वानी परिसर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि पहाड़ी राज्य का विकास केवल सड़कों और भौतिक सुविधाओं के विस्तार तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा, कौशल विकास, सुनियोजित पर्यटन और सामाजिक अवसंरचना को भी समान प्राथमिकता देनी होगी।

सतत अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन एवं समावेशी विकास हेतु युवा-नेतृत्व वाले नवाचार के माध्यम से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का रूपांतरण’ विषय पर आयोजित सेमिनार का शुक्रवार को समापन हुआ। स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और पीडीपी विभाग की ओर से ‘आरोही’ संस्था के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों, शोधार्थियों, उद्योग प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने राज्य के दीर्घकालिक विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की।

उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राज शेखर जोशी ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक अवसंरचना के साथ सामाजिक अवसंरचना को भी प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने ग्रामीण विकास, कौशल सुधार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भविष्य की जरूरतों से जोड़ते हुए विकास की व्यापक रणनीति पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. डॉ. संजय कुमार ने राज्य में उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे युवाओं की क्षमता का उपयोग राज्य के भीतर किया जा सकेगा।

‘विजन उत्तराखंड 2047’ के तहत आयोजित पैनल चर्चा में प्रति व्यक्ति आय की असमानता कम करने और सतत विकास के माध्यम से युवाओं के पलायन को रोकने पर विशेष जोर दिया गया। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल कुमार जोशी ने चर्चा का संचालन किया।

पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ने कम चर्चित पर्यटन स्थलों को विकसित करने और कौशल प्रमाणन पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो. पी.डी. पंत ने नदियों के संरक्षण में स्थानीय संस्कृति और संसाधनों की भूमिका रेखांकित की। वहीं, वाटरशेड प्रबंधन निदेशालय के डॉ. एस.के. उपाध्याय ने जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया।

आईसीएआर-आईवीआरआई के डॉ. शेर सिंह ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता बताई। आरोही सोसाइटी के समिरन नारायण ने पर्यटन को समावेशी और सुनियोजित तरीके से विकसित करने की बात कही।

हाइब्रिड मोड में आयोजित सेमिनार में देशभर के शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। चार प्रमुख विषयों—सतत अवसंरचना एवं जलवायु परिवर्तन, उद्यमिता एवं युवा सशक्तिकरण, विजन उत्तराखंड 2047 एवं निरंतरता तथा ऑनलाइन ट्रैक—के अंतर्गत विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

चर्चा में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, ग्रीन इंजीनियरिंग, ऊर्जा सुरक्षा, इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। सेमिनार में प्रस्तुत विचारों का केंद्रीय संदेश यही रहा कि उत्तराखंड की विकास रणनीति में आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करना जरूरी है।सेमिनार के दौरान आयोजित पोस्टर-मेकिंग प्रतियोगिता में ग्राफिक एरा हल्द्वानी के बीएजेएमसी विभाग की लक्ष्मी पंवार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। एमआईईटी के शैलेंद्र कांडपाल दूसरे स्थान पर रहे, जबकि एमआईईटी की वर्षा नैनवाल और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की शगुन जलहोत्रा संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं। परिणीत वर्मा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

कार्यक्रम के समापन पर सह-संयोजक डॉ. आनंद जोशी ने अतिथियों, शोधार्थियों और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार जताया।

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