

सनातन धर्म पर फैलाए जा रहे भ्रम का प्रमाणों के साथ देंगे जवाब: बाबा रामदेव!
हरिद्वार में भारतीय प्राच्य विद्या परिषद का 104वां अधिवेशन आज से, राज्यपाल करेंगे शुभारंभ; शंकराचार्य समेत देश-विदेश के विद्वान होंगे शामिल!
दर्पण न्यूज 24/7 | हरिद्वार।
सनातन धर्म, धार्मिक ग्रंथों और आराध्य देवी-देवताओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर जवाब देने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्रसंगों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं और भगवान शिव, भगवान राम, माता सीता तथा भगवान श्रीकृष्ण के चित्रण को लेकर भ्रामक धारणाएं फैला रहे हैं। बाबा रामदेव के मुताबिक, इन विषयों की वास्तविकता सामने लाने के लिए पतंजलि की ओर से आयोजित भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वामी रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराओं और धर्मशास्त्रों से जुड़े विषयों को उनके वास्तविक संदर्भ में समझना जरूरी है। धार्मिक ग्रंथों के प्रसंगों को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे विषयों पर भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के बजाय प्रामाणिक तथ्यों, मूल ग्रंथों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर विमर्श होना चाहिए।
तीन दिवसीय अधिवेशन में होगी प्राचीन ज्ञान परंपरा पर चर्चा!
बाबा रामदेव ने बताया कि पतंजलि की ओर से 29 अक्टूबर से आयोजित तीन दिवसीय भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में सनातन परंपरा, धर्मशास्त्रों और प्राचीन भारतीय ज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। अधिवेशन का शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल करेंगे। इसमें शंकराचार्य, शीर्ष धर्माचार्य और देश-विदेश के विद्वानों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
अधिवेशन में विभिन्न दावों और धार्मिक प्रसंगों की पड़ताल करते हुए उनके मूल संदर्भों तथा उपलब्ध प्रमाणों को सामने रखने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाना बताया गया है।
प्रमाण और संदर्भ के आधार पर विमर्श पर जोर!
स्वामी रामदेव ने कहा कि आस्था से जुड़े विषयों पर किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले संबंधित ग्रंथों और उनके मूल संदर्भों को समझना आवश्यक है। सनातन धर्म से जुड़े विमर्श में तथ्यों की प्रामाणिकता और शास्त्रीय संदर्भों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रेसवार्ता में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद रहे। अब इस तीन दिवसीय अधिवेशन में होने वाली चर्चाओं और विद्वानों के तर्कों पर नजर रहेगी, जिनके आधार पर सनातन परंपराओं से जुड़े विभिन्न दावों की समीक्षा की जाएगी।
