खबरें शेयर करें -

रेल पटरी पर हाथी की मौत, वन्यजीव सुरक्षा पर फिर उठे सवाल!

हल्दी रोड–छतरपुर के बीच बाघ एक्सप्रेस की चपेट में आया नर हाथी, लोको पायलट के खिलाफ मुकदमा दर्ज!

 

दर्पण न्यूज 24/7 |

लालकुआं/रुद्रपुर। लालकुआं–रामपुर रेलखंड पर हल्दी रोड और छतरपुर के बीच ट्रेन की चपेट में आने से करीब 40 वर्षीय नर हाथी की मौत हो गई। बुधवार को हुए इस हादसे ने आरक्षित वन क्षेत्र से गुजरने वाली रेल लाइन पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद रेल संचालन प्रभावित हुआ और इंजन को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। वन विभाग ने संबंधित ट्रेन के लोको पायलट के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ट्रेन की टक्कर से टूटा हाथी का दांत, मौके पर पहुंची टीमें!

प्राप्त जानकारी के अनुसार, काठगोदाम से हावड़ा जा रही बाघ एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 13020) हल्दी रोड और छतरपुर के बीच से गुजर रही थी। इसी दौरान हाथी ट्रेन की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि हाथी का एक दांत टूटकर दूर जा गिरा। रेलवे प्रशासन ने दांत को सुरक्षा की दृष्टि से अपने कब्जे में लिया, जिसे बाद में औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर वन विभाग को सौंप दिया गया।

घटना की सूचना मिलते ही रेलवे और वन विभाग में हलचल मच गई। प्रभागीय वनाधिकारी उमेश चंद्र तिवारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी अमित ग्वासकोटी, टांडा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम और रुद्रपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी लक्ष्मण सिंह बिष्ट सहित विभागीय टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल, रेलवे ट्रैक और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई शुरू की।

 

लोको पायलट के खिलाफ मुकदमा, गति की भी होगी जांच।

वन विभाग ने हाथी की मौत के मामले में संबंधित ट्रेन के लोको पायलट के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि हादसे के समय ट्रेन निर्धारित गति सीमा के भीतर चल रही थी या नहीं।

हालांकि, लोको पायलट के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने आप में लापरवाही साबित नहीं करता। हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

डेढ़ से दो घंटे प्रभावित रहा रेल संचालन!

हादसे के बाद ट्रेन को मौके पर रोकना पड़ा। इंजन में तकनीकी खराबी और क्षति की जानकारी भी सामने आई। आवश्यक जांच और तकनीकी सुधार के बाद ट्रेन को करीब डेढ़ से दो घंटे की देरी से आगे रवाना किए जाने की सूचना है। ट्रेन में सवार यात्रियों के सुरक्षित रहने की जानकारी भी सामने आई है।

वन विभाग के चिकित्सक डॉ. राहुल लती और पशु चिकित्सक हिमांशु पाठक की टीम ने मृत हाथी के शव का पोस्टमार्टम किया। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को नियमानुसार दफना दिया गया।

सर्दियों में बढ़ती है हाथियों की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल!

प्रभागीय वनाधिकारी उमेश चंद्र तिवारी के अनुसार, सर्दियों के मौसम में रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की आवाजाही बढ़ जाती है। आरक्षित वन क्षेत्र से गुजरने वाले इस रेलमार्ग पर पहले भी वन्यजीवों के साथ ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान की सिफारिशों के आधार पर रेलवे की ओर से एनिमल इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम स्थापित किया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था अभी पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए दोनों रेल ट्रैकों पर प्रभावी सुरक्षा और निरोधात्मक उपाय किए जाएंगे।

बड़ा सवाल: हाथियों की आवाजाही वाले रेलखंड पर सुरक्षा कितनी प्रभावी?

एक हाथी की मौत के बाद केवल मुकदमा दर्ज करने और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने से वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती। सबसे अहम सवाल यह है कि हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील रेलखंड पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है, ट्रेन की गति पर नियंत्रण की व्यवस्था क्या है और दुर्घटना रोकने के लिए निर्धारित सुरक्षा उपायों का कितना पालन हो रहा है।

यदि इस क्षेत्र में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, तो उनकी समीक्षा कर ठोस निवारक कदम उठाना और भी जरूरी हो जाता है। अब जांच में हादसे के कारणों, ट्रेन की गति, उपलब्ध सुरक्षा प्रणालियों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी की स्पष्ट तस्वीर सामने आना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और वन्यजीव को अपनी जान न गंवानी पड़े।

उत्तराखंड