एक ओर जन जन की सरकार जनता के द्वार दूसरी तरफ सड़क पर अधिकार की हुंकार — लालकुआं में कल संवाद भी, संग्राम भी!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।
एक ओर सरकार योजनाओं की रोशनी लेकर जनता के आंगन तक पहुँचने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर जनता अपने अधिकारों की मशाल लेकर सड़कों पर उतरने को तैयार है। कल 18 फरवरी को लालकुआं की धरती पर एक साथ दो तस्वीरें उभरेंगी—एक में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” बहुद्देशीय शिविर के जरिए समाधान का संवाद होगा, तो दूसरी ओर बिंदुखत्ता की महारैली में वर्षों पुरानी राजस्व गांव की मांग की गूंज सुनाई देगी।
राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जनकल्याणकारी सोच को धरातल पर उतारते हुए नगर पंचायत कार्यालय परिसर में बहुद्देशीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर की अध्यक्षता जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल करेंगे। शिविर का उद्देश्य है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी कागजों से निकलकर सीधे आमजन के जीवन तक पहुँचे।
यह शिविर केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उम्मीदों का दरवाजा है—जहाँ समस्याओं की फाइलें नहीं, बल्कि समाधान की राह खुलेगी। विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही छत के नीचे उपस्थित रहेंगे, ताकि नागरिकों को भटकना न पड़े और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री की मंशा साफ है—
“सरकार की रोशनी हर चौखट तक पहुँचे,
कोई भी हक से वंचित न रहे, हर दिल तक पहुँचे।”
इसी दिन लालकुआं की सड़कों पर एक और कहानी लिखी जाएगी। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर हजारों लोगों की महारैली प्रस्तावित है। यह रैली वर्षों से अधूरे सपनों की आवाज होगी, जिसमें लोग अपने अधिकारों की पुकार को शासन-प्रशासन तक पहुँचाएंगे।
कल का दिन लालकुआं के लिए केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र की दो धाराओं का संगम होगा—
एक ओर सरकार जनता के द्वार दस्तक देगी,
तो दूसरी ओर जनता अपने अधिकारों की दस्तक शासन के द्वार तक पहुँचाएगी।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर योजनाओं का लाभ उठाएं। वहीं, क्षेत्र की जनता भी अपनी एकजुटता के साथ यह संदेश देने को तैयार है कि विकास और अधिकार—दोनों की राह जनता की आवाज से होकर ही गुजरती है।