दूरियों को मिटाने आया सहकार का संदेश,
केरल से कुमाऊं तक जुड़ा दुग्ध विकास का परिवेश!
दर्पण न्यूज 24/7 | हल्द्वानी/लालकुआं।
सहकारिता की खुशबू जब सीमाओं को पार करती है, तो विकास की नई इबारत लिखी जाती है। इसी भावना को साकार करते हुए केरल के मालावार क्षेत्र से पहुंचे 19 सदस्यीय दुग्ध संघ प्रतिनिधिमंडल का हल्द्वानी में भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। नैनीताल आंचल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश बोरा के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह ने न केवल अतिथि सत्कार की परंपरा को जीवंत किया, बल्कि अंतरराज्यीय सहयोग के नए द्वार भी खोल दिए।
हल्द्वानी स्थित बैंक्विट हॉल में आयोजित स्वागत समारोह में अतिथियों को पारंपरिक कुमाऊनी टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया और श्रद्धा स्वरूप बाबा नीम करोली महाराज की तस्वीर भेंट की गई। यह सम्मान केवल परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि दिलों के जुड़ने और संस्कृतियों के मिलने का संदेश भी था।
अपने संबोधन में अध्यक्ष मुकेश बोरा ने कहा कि जब अनुभवों का संगम होता है, तो विकास की धारा और प्रबल हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराज्यीय भ्रमण से दुग्ध उत्पादन, विपणन और प्रबंधन के क्षेत्र में नई तकनीकों और अनुभवों का आदान-प्रदान होता है, जिससे दोनों राज्यों के दुग्ध संघों को पारस्परिक लाभ मिलता है। उन्होंने इसे सहकारिता के क्षेत्र में ज्ञान और नवाचार के विस्तार की महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम का संचालन मार्केटिंग एवं प्रशासन प्रबंधक संजय भाकुनी ने प्रभावी ढंग से किया। सौहार्द और आत्मीयता से ओतप्रोत इस आयोजन में केरल से आए प्रतिनिधियों ने कुमाऊं की समृद्ध संस्कृति, आत्मीय आतिथ्य और परंपराओं की मुक्तकंठ से सराहना की। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से जनरल मैनेजर प्रेमलाल, फेडरेशन डायरेक्टर श्रीनिवासन और यूनियन डायरेक्टर पी.पी. नारायण शामिल रहे।
इस अवसर पर दुग्ध संघ के सामान्य प्रबंधक अनुराग शर्मा, संजय भाकुनी, सुभाष बाबू, शांति कोरंगा, हेमंत पाल, विपिन चंद्र तिवारी, पुरन मिश्रा, प्रखर शाह, विमल कुमार, कुलदीप रैकवाल, लोकेश शर्मा, सुमित तिवारी, त्रिलोक नगदली, मनोज चुनौरा, पारस कुलौरा, सुमित कुमार, सुमित पांडे और मोहन सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब सहकारिता के हाथ मिलते हैं, तो विकास की राह और विस्तृत हो जाती है—और जब केरल और कुमाऊं जैसे दो सांस्कृतिक ध्रुव मिलते हैं, तो केवल अनुभव नहीं, बल्कि विश्वास और भविष्य भी साझा होता है।
