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उपनल कर्मियों को मिला न्याय, समान कार्य–समान वेतन पर कैबिनेट की मुहर!
2015 तक 10 साल पूरे करने वालों को तत्काल लाभ, तीन चरणों में होगा वेतन निर्धारण!
दर्पण न्यूज 24/7 देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उपनल कर्मियों के हित में बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने उपनल कर्मचारियों को समान कार्य–समान वेतन देने पर सहमति जता दी है, जिसका लाभ चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश के करीब 7 हजार उपनल कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के तहत वर्ष 2015 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को शासनादेश जारी होने के साथ ही समान कार्य–समान वेतन का लाभ मिलेगा। इन कर्मचारियों को विभागीय संविदा में शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं वर्ष 2016, 2017 और 2018 में कार्यरत उपनल कर्मियों को तीन चरणों में विभागीय संविदा पर लेते हुए समान वेतन का निर्धारण किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2032 तक सभी उपनल कर्मियों को समान कार्य का समान वेतन देना है।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उपनल कर्मचारियों के साथ न्याय होगा और आज उसी दिशा में ठोस फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब आगे से उपनल में नियुक्ति केवल भूतपूर्व सैनिकों के परिजनों को ही दी जाएगी।
कैबिनेट बैठक के बाद उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर इस निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया। कर्मचारियों ने कहा कि यह फैसला लंबे समय से चली आ रही उनकी मांगों को पूरा करता है और उनके सम्मान व आर्थिक सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उपनल कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके योगदान को सरकार पूरी गंभीरता से मान्यता देती है। राज्य सरकार उनके हितों, सम्मान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के नियमितीकरण के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई, लेकिन वहां से भी सरकार को राहत नहीं मिली थी। अब कैबिनेट के इस निर्णय को उपनल कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले:
यूसीसी (समान नागरिक संहिता) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी, अध्यादेश लाया जाएगा।
उत्तराखंड पर्यटन नियमावली को मंजूरी, होम-स्टे योजना का लाभ केवल स्थायी निवासियों को मिलेगा।
चीनी मिलों के लिए गन्ने का अगेती मूल्य ₹405 प्रति क्विंटल तय।
निर्वाचन विभाग की सेवा नियमावली को स्वीकृति।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम बदलकर उत्तराखंड संस्कृत संस्थान किया गया।
यूकॉस्ट के तहत अल्मोड़ा व चंपावत साइंस सेंटर के लिए 6-6 पद स्वीकृत।
दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र के लिए 6 पदों को मंजूरी।
विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के लिए विधायक, सांसद व राज्य स्तर पर पुरस्कार राशि और ट्रॉफी तय।
कैबिनेट के इन फैसलों से प्रदेश के कर्मचारियों, किसानों, पर्यटन और खेल जगत से जुड़े लोगों में सकारात्मक संदेश गया है।