“ज़ीरो टॉलरेंस के दावों के बीच ज़ीरो ईमानदारी का खेल।
बाजपुर चीनी मिल में लाखों का लूट-तमाशा बेनकाब”
दर्पण न्यूज 24/7 बाजपुर। बाजपुर सहकारी चीनी मिल में वर्ष 2022–23 के दौरान गन्ना बीज खरीद, परिवहन और भुगतान में लाखों रुपये के कथित फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला उजागर होने के बाद सहकारिता तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उच्च स्तरीय जांच पूरी होने के बाद सामने आए चौंकाने वाले तथ्यों ने “जीरो टॉलरेंस” की नीति के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए बाजपुर चीनी मिल के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अलग-अलग चीनी मिलों में सम्बद्ध कर दिया गया है। इससे पूर्व गन्ना आयुक्त स्तर पर हुई जांच में प्रकरण से जुड़े गन्ना विकास समिति बाजपुर के तत्कालीन ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक इब्राहिम और गन्ना सुपरवाइजर रामपाल को भी निलंबित किया जा चुका है।
सूत्रों के अनुसार किसानों को उन्नत प्रजाति का गन्ना बीज उपलब्ध कराने के नाम पर मिल की सह इकाई गन्ना विकास समिति द्वारा बाहरी राज्यों से बीज मंगाने की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। शासन द्वारा तय दरों पर भुगतान मिल के माध्यम से होना था, लेकिन वर्ष 2022–23 में अधिकारियों ने रीजनल रिसर्च स्टेशन कपूरथला से सीओपीबी–95 प्रजाति का बीज मंगाने का दावा किया, जो बाद में फर्जी साबित हुआ।
प्रकरण का खुलासा क्षेत्र के जागरूक किसान नेता बलदेव सिंह की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में बताया गया कि निर्धारित दर 345 व 355 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक की कटौती की गई। जांच में यह भी सामने आया कि जिस गन्ना बीज को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से लाया जाना दर्शाया गया था, वह वास्तव में वहां से आया ही नहीं था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच उत्तराखंड सहकारी चीनी मिल संघ को सौंपी गई, जहां अधिशासी निदेशक चीनी मिल किच्छा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि गन्ना बीज परिवहन के नाम पर फर्जी बिल्टियां तैयार कर 708.15 क्विंटल के सापेक्ष केवल 513.20 क्विंटल का समायोजन दर्शाया गया और वह भी 800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से। गेटपास, वाहन संख्या, बिल्टी और परिवहन अभिलेखों में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन वाहनों से परिवहन दर्शाया गया, वे कई मामलों में ट्रक नहीं बल्कि दोपहिया वाहन के रूप में पंजीकृत थे। शेरे पंजाब रोड लाइन्स, होशियारपुर के नाम से दर्शाई गई बिल्टियां अधूरी व संदिग्ध पाई गईं। भुगतान से पूर्व बिल्टी और धर्मकांटे की तौल पर्ची का सत्यापन अनिवार्य होने के बावजूद लेखा परीक्षण नहीं किया गया।
इतना ही नहीं, करनाल, गुरदासपुर, कपूरथला और फरीदकोट से गन्ना बीज परिवहन व शोध केंद्रों से कटाई-लदाई का कार्य बिना ई-निविदा प्रक्रिया अपनाए केवल कोटेशन के आधार पर सितारगंज की एक फर्म को सौंपा गया, जिसमें 2.50 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। इसे अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन माना गया।
वेज बोर्ड कर्मचारी निलंबित
बाजपुर। बाजपुर सहकारी चीनी मिल की प्रधान प्रबंधक अमृता शर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि वेज बोर्ड कर्मचारी वीर सेन राठी को जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबित कर दिया गया है। प्रकरण में शामिल अन्य दो अधिकारियों को उत्तराखंड चीनी मिल संघ स्तर से निलंबित किया गया है।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रबंध निदेशक प्रकाश चन्द्र दुम्का ने बताया कि तत्कालीन प्रभारी मुख्य गन्ना अधिकारी राजीव कुमार, प्रभारी मुख्य लेखाकार वीर सेन राठी तथा प्रभारी ज्येष्ठ गन्ना विकास अधिकारी दीपिका द्वारा वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। तीनों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कई सौ करोड़ रुपये के संचित घाटे से जूझ रही बाजपुर सहकारी चीनी मिल में इस तरह के फर्जीवाड़े मिल को सुनियोजित ढंग से बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो इसका सीधा असर किसानों, मजदूरों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
दर्पण न्यूज 24/7
