खबरें शेयर करें -

खटीमा हलचल: जंगल में शराब भट्ठियां धधकीं, आंदोलनकारियों का प्रदर्शन; चीनी के दाम पर उक्रांद का सरकार को अल्टीमेटम!
दर्पण न्यूज 24/7 | खटीमा संवाददाता करन सतवाल!
खटीमा। सोमवार को खटीमा क्षेत्र में दिनभर अलग-अलग मुद्दों को लेकर हलचल बनी रही। आबकारी विभाग ने जंगल में कच्ची शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो सुलगती भट्ठियां नष्ट कीं, वहीं राज्य आंदोलनकारियों ने चिन्हीकरण और आरक्षण समेत विभिन्न मांगों को लेकर तहसील में प्रदर्शन किया। दूसरी ओर चीनी के बढ़ते दामों को लेकर उक्रांद कार्यकर्ताओं ने सरकार को घेरा और जमाखोरी पर अंकुश लगाने की मांग की। इसी बीच सीमा सुरक्षा बल के पूर्व इंस्पेक्टर होशियार सिंह खनका के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
जंगल में धधक रही थीं कच्ची शराब की भट्ठियां, 60 लीटर शराब बरामद!
कच्ची शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई में खमरिया गांव से सटे जंगल में नाले के किनारे दो सुलगती भट्ठियां मिलीं। टीम ने दोनों भट्ठियों को मौके पर ही नष्ट कर दिया। तलाशी के दौरान करीब 60 लीटर कच्ची शराब बरामद हुई, जबकि 1400 किलोग्राम लाहन भी मौके पर नष्ट किया गया।
आबकारी आयुक्त और जिला आबकारी अधिकारी के निर्देश पर आबकारी निरीक्षक बृजेश जोशी के नेतृत्व में टीम ने शराब निर्माण, बिक्री और भंडारण के अड्डों के खिलाफ अभियान चलाया। छापेमारी की भनक लगते ही शराब माफिया मौके से फरार हो गए। टीम में उप आबकारी निरीक्षक जगदीश कुमार, प्रधान आबकारी सिपाही नितेश भारद्वाज, दीपक चंद्र, बबीता राय और रचिता पांडे शामिल रहे।
25 साल बाद भी चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारी, तहसील में प्रदर्शन!
राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने के बावजूद चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों ने तहसील पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने एसडीएम तुषार सैनी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर चिन्हीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिलाने और नियुक्तियों से वंचित आंदोलनकारी परिवारों को न्याय देने की मांग की।
आंदोलनकारियों का कहना था कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी वास्तविक आंदोलनकारी चिन्हीकरण से बाहर हैं। उनका आरोप है कि एक ही जिले और तहसील में चिन्हीकरण के अलग-अलग मानक अपनाए गए, जिसके चलते कई वास्तविक आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण रद्द हुआ।
उन्होंने पेंशन बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने, चिन्हित आंदोलनकारियों को राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा देने तथा दोहरी पेंशन के नियमों के कारण बंद की गई पेंशन को दोबारा शुरू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
इस दौरान भगवान जोशी, रमेश चंद्र पांडेय, हरीश चंद्र फुलेरा, वीर बहादुर चंद, धनीचंद, राम सिंह धामी, नारायण सिंह दानू, महेश चंद, गीता काण्डपाल और निर्मला मेहता समेत कई आंदोलनकारी मौजूद रहे।
बीएसएफ के पूर्व इंस्पेक्टर होशियार सिंह खनका का निधन!
महतगांव चकरपुर निवासी सीमा सुरक्षा बल के पूर्व इंस्पेक्टर होशियार सिंह खनका का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह देश की विभिन्न सीमाओं पर अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनके निधन की खबर से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
उनकी पत्नी हीरा देवी और दो पुत्र मनोज खनका व कमल खनका का भी दो वर्ष पूर्व निधन हो चुका था। वह अपने पीछे दो विधवा पुत्रवधू, दो पौत्र और दो पौत्रियों को छोड़ गए।
उनका अंतिम संस्कार बनबसा स्थित शारदा घाट पर किया गया। छोटे भाई सुरेश सिंह खनका ने मुखाग्नि दी। 57वीं एसएसबी बटालियन की सम्मान टुकड़ी ने असिस्टेंट कमांडेंट दिनेश यादव के नेतृत्व में पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पूर्व कमांडेंट गोविंद सिंह बिष्ट समेत बड़ी संख्या में पूर्व और वर्तमान एसएसबी अधिकारी व क्षेत्रवासी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे।
चीनी के बढ़ते दाम पर उक्रांद का हमला, जमाखोरी पर कार्रवाई की मांग
चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी के खिलाफ उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने तहसील में प्रदर्शन कर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चीनी के दाम बढ़ने से आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है, जबकि पुराने स्टॉक को भी बढ़ी कीमतों पर बेचकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
उक्रांद ने प्रशासन और आपूर्ति विभाग से दुकानों व गोदामों में स्टॉक की जांच कराने, जमाखोरी के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाने तथा स्टॉकिस्ट, थोक और फुटकर विक्रेताओं की स्टॉक सीमा निर्धारित करने की मांग की।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया और जमाखोरी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो उक्रांद आंदोलन तेज करेगा।