








सीजनल फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा
नैनीताल, 25 अगस्त। मौसम में बदलाव के साथ सीजनल इन्फ्लूएंजा (मौसमी फ्लू) और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल डॉ. रश्मि पंत ने जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्क रहने और आवश्यक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं।
सीएमओ ने जिला चिकित्सालय, उप जिला चिकित्सालय, राजकीय मेडिकल कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी, जरूरी दवाओं, चिकित्सा सामग्री, ऑक्सीजन सहित अन्य संसाधनों की नियमित समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने श्वसन संबंधी लक्षण वाले मरीजों की समय पर जांच और उपचार तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने के निर्देश दिए।
बुखार-खांसी को हल्के में न लें
डॉ. पंत ने आमजन से अपील की है कि बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, बदन दर्द अथवा सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। बुखार होने पर पर्याप्त आराम करने, पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही दवा लेने की सलाह दी गई है।
उन्होंने कहा कि खांसते या छींकते समय मुंह-नाक को रुमाल अथवा टिश्यू से ढकें और हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। घर में किसी सदस्य को संक्रमण के लक्षण हों तो बुजुर्गों, छोटे बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों के संपर्क में विशेष सावधानी बरतें।
बिना सलाह एंटीबायोटिक लेने से बचें
सीएमओ ने स्पष्ट किया कि बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन न करें। यदि तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या मरीज की हालत बिगड़ती दिखाई दे तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए।
डॉ. पंत ने कहा कि मौसमी बुखार और श्वसन संक्रमण से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं बरती जानी चाहिए। समय पर पहचान, उचित उपचार और संक्रमण से बचाव के उपाय ही बीमारी से बचाव के प्रभावी माध्यम हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों और चिकित्सा संस्थानों को निगरानी व्यवस्था मजबूत रखने के साथ ही जनजागरूकता अभियान पर भी जोर देने के निर्देश दिए हैं, ताकि सीजनल इन्फ्लूएंजा एवं अन्य श्वसन रोगों के मामलों की समय पर पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
