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उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका
उपनलकर्मियों की स्थायी नौकरी पर लगी अंतिम मुहर, समीक्षा याचिका भी खारिज

देहरादून। उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की समीक्षा याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है, जिससे 15 अक्टूबर 2024 के अपने फैसले को बरकरार रखते हुए उपनलकर्मियों की पक्की नौकरी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने सरकार की ओर से दायर सभी समीक्षा याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अक्टूबर 2024 को पारित फैसले में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं है और पुनर्विचार की कोई आवश्यकता नहीं बनती। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि वह हाईकोर्ट के निर्णय में दखल देने के इच्छुक नहीं है।

यह मामला 2018 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कुंदन सिंह व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि उपनल के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को नियमितीकरण नीति के अनुसार एक वर्ष के भीतर चरणबद्ध तरीके से नियमित किया जाए। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 15 अक्टूबर 2024 को शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार की अपीलें खारिज कर दी थीं। अब समीक्षा याचिका भी निरस्त होने के बाद सरकार के सामने कोई कानूनी विकल्प शेष नहीं रह गया है।

इस फैसले के बाद राज्य के विभिन्न विभागों में उपनल के माध्यम से कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण का रास्ता लगभग तय हो गया है। लंबे समय से स्थायी नौकरी की मांग कर रहे इन कर्मचारियों में खुशी का माहौल है, वहीं सरकार के लिए अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू करने का दबाव बढ़ गया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस दो-टूक फैसले के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार आगे की कार्यवाही कैसे और कब शुरू करती है।

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