दर्पण न्यूज 24*7 की विशेष रिपोर्ट: जब बारात से ठीक पहले दुल्हन हुई गायब… छोटी बहन ने उठाया साहसिक कदम, समाज को आईना दिखा गई यह घटना
पिथौरागढ़। आजकल आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जो न सिर्फ परिवारों को तोड़ देती हैं, बल्कि हमारी सामाजिकता को भी कटघरे में खड़ा कर
देती हैं। देवभूमि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद से आई यह खबर भी कुछ ऐसी ही है—दर्द से भरी, मार्मिक और समाज की सोच पर गहरा प्रश्नचिन्ह छोड़ जाने वाली।
घर में मेहंदी की खुशबू थी, हल्दी की रौनक थी… गीत–संगीत से आंगन भर उठा था। रिश्तेदारों की हंसी और ढोलक की थापों में आने वाली खुशियों का रंग साफ झलक रहा था। लेकिन इन उत्सवों के बीच कौन जानता था कि अगले ही पल इस परिवार पर एक ऐसा तूफान टूटने वाला है जो वर्षों तक उनकी यादों को चुभता रहेगा।
दिल्ली में कार्यरत 25 वर्षीय युवती की शादी तय थी। सारे इंतज़ाम हो चुके थे। बड़ी बेटी की मेहंदी भी लग चुकी थी, नृत्य–गीत से पूरा घर झूम उठा था। लेकिन बारात पहुंचने से ठीक एक दिन पहले अचानक दुल्हन गायब हो गई। फोन बंद, कोई संदेश नहीं… परिवार ने दर–दर भटककर खोज की, लेकिन बेटी का कोई अता–पता नहीं मिला।
चारों तरफ सवाल ही सवाल, रिश्तेदारों की बेचैनी और पिता की आंखों में तैरते भय—“अब क्या होगा?”
इज्जत दांव पर लगी थी, समय रुक नहीं रहा था और समाज की निगाहें घर पर टिकी थीं।
इन्हीं पलों में छोटी बेटी ने वो साहस दिखाया जिस पर किसी का भी दिल पसीज जाए। उसने पिता को सहारा देते हुए कहा—“बाबूजी, आप चिंता मत कीजिए… मैं शादी करूंगी। घर की इज्जत नहीं गिरने दूंगी।”
यह सुनते ही पूरा घर स्तब्ध रह गया। दूल्हा और उसके परिजन भी परिस्थिति को समझते हुए सहमत हो गए।
और फिर—
जहां बड़ी बहन के फेरे होने थे, वहीं छोटी बहन ने कन्यादान की वेदिका पर कदम रखकर घर की लाज बचा ली।
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है जहां इज्जत का बोझ अक्सर बेटियों के कंधों पर डाल दिया जाता है। यह कहानी दिल को छू जाने वाली है—साहस, बेबसी और सामाजिक दबावों की मार्मिक दास्तान।
ऐसी घटनाएं बार–बार हमें झकझोरती हैं कि आखिर हम कैसा समाज बना रहे हैं, और किस कीमत पर?
