मुनस्यारी में कानून–व्यवस्था चरमराई: “आख़िर जिम्मेदार कौन…?”
मुनस्यारी बचाओ संघर्ष समिति का बड़ा सवाल।
मुनस्यारी।
पर्यटन नगरी मुनस्यारी में लगातार बिगड़ते हालातों को देखते हुए मुनस्यारी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत सिंह मर्तोलिया ने दस गंभीर मुद्दे उठाते हुए प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
मर्तोलिया का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते अपराध, नशे का बढ़ता कारोबार, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण न होना और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था का ध्वस्त होना चिंताजनक है। उन्होंने जनता से भी आह्वान किया है कि “आख़िर इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”—अपनी राय बेझिझक सामने रखें।
मर्तोलिया द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे—
1. रहस्यमयी मौतों पर SIT की जांच ठप:
भाई प्रदीप दरियाल, बहन बसंती देवी शाही और भाई प्रकाश सिंह बिष्ट की मौत के लिए गठित SIT अब तक कोई ठोस खुलासा नहीं कर पाई है। परिजन और क्षेत्रवासी न्याय की प्रतीक्षा में हैं।
2. अवैध स्नूकर सेंटरों की भरमार:
मुनस्यारी में बिना किसी मान्य लाइसेंस के स्नूकर सेंटर खुलकर चल रहे हैं, जहां युवा पीढ़ी भटक रही है। सामान्य दुकान लाइसेंस के सहारे ये सेंटर अवैध रूप से फल-फूल रहे हैं।
3. दुकानों में अवैध शराब की बिक्री:
कई दुकानें और रेस्टोरेंट बिना अनुमति के शराब परोस रहे हैं। खुलेआम शराब पार्टियों का आयोजन आम बात हो गई है।
4. नशे में अराजकता:
बाजारों में शराबी गाली-गलौज कर रहे हैं, जिससे पर्यटक व स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
5. बिना लाइसेंस वाहन संचालन:
कई दोपहिया और चारपहिया वाहन बिना लाइसेंस और बिना बीमा के दौड़ रहे हैं, जो कानून की खुली धज्जियां उड़ाते हैं।
6. नशे में वाहन चलाने के बढ़ते मामले:
शराब पीकर वाहन चलाने वालों की संख्या बढ़ने से रोजाना हादसे हो रहे हैं। राहगीर लगातार चोटिल हो रहे हैं।
7. खुलेआम चल रहा अवैध जुआ:
जुआखानों में अनेक परिवार बर्बाद हो चुके हैं। महिलाओं और बच्चों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
8. चरस का फैलता जाल:
मुनस्यारी में चरस का धंधा तेजी से बढ़ रहा है। 300 से ज्यादा युवा और किशोर इससे प्रभावित बताए जा रहे हैं।
9. कानून व्यवस्था चौपट:
अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं रह गया है। आम नागरिक भयभीत है।
10. पर्यटन पर खतरा:
देश-विदेश से आने वाले पर्यटक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे। इसका सीधा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है।
