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“हाथियों और गुलदार का दोहरा आतंक! विभाग की चुप्पी से उबल रहे ग्रामीण – दिशा बैठक में भी गूंजा बरेली रोड के गांवों का दर्द”!
दर्पण न्यूज 24*7
विकासखंड हल्द्वानी के बरेली रोड से सटे तमाम ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इन दिनों डर और दहशत की जिंदगी जी रहे हैं। एक ओर जंगली हाथियों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा, वहीं दूसरी ओर गुलदार (लेपर्ड) की बढ़ती सक्रियता ने लोगों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल कर दिया है। रात तो छोड़िए, अब दिन में भी ग्रामीणों को खेत–खलिहानों में जाने से डर लग रहा है।
नेताओं के निर्देश हवा में, विभाग पूरी तरह मौन!
ग्रामीणों की बार-बार की शिकायतों, जनप्रतिनिधियों के निर्देशों और लगातार बढ़ते हमलों के बावजूद वन विभाग की चुप्पी समझ से परे है। विधायक और सांसद कई बार साफ निर्देश दे चुके हैं कि ग्रामीणों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाए और फसलों के नुकसान का त्वरित आंकलन कर मुआवजा दिया जाए—लेकिन हकीकत में ज़मीनी स्तर पर कोई कार्रवाई होती नज़र नहीं आती।
ज़िम्मेदार अधिकारी न तो प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और न ही नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस कदम उठा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों को उनकी समस्या से कोई सरोकार ही नहीं।
दहशत की दोहरी मार: हाथियों से फसलें तबाह, लेपर्ड से जान का खतरा
कई गांवों में हाथियों के झुंड ने खेतों को पूरी तरह चौपट कर दिया।
वहीं गुलदार की दहशत के कारण बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
पशुधन पर हमले बढ़ रहे हैं, कई मवेशियों को गुलदार ने निशाना बनाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे हर पल डर के साए में जी रहे हैं—“न खेत सुरक्षित, न घरों के आस-पास का इलाका!”
दिशा बैठक में भी गूंजा ग्रामीणों का दर्द।
जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। जनप्रतिनिधियों ने विभाग को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि हाथियों और गुलदार के आतंक के समाधान को प्राथमिकता दी जाए।
लेकिन विभाग की उदासीनता वैसी की वैसी बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है।
ग्रामीणों की चेतावनी – अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तय
ग्रामीणों की मांगें साफ हैं:
फसल क्षति का त्वरित सर्वे
उचित मुआवजा
प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ाना।
हाथियों और गुलदार की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजाम।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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