दून का ‘स्वच्छ भोजन मॉडल’ देश में मिसाल: इस्तेमाल हुए तेल पर अब लोहे की लगाम, मिलावटखोरों की खैर नहीं!
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने खाद्य सुरक्षा और जन-स्वास्थ्य को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम उठाया है। दून में विकसित ‘स्वच्छ भोजन मॉडल’, जिसे सही भोजन भारत अभियान और इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल के पुनः उपयोग रोकथाम कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया है, अब पूरे राज्य में तेज गति से लागू किया जा रहा है। इस अभिनव व्यवस्था की भारतीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी सराहना की है।
राज्य खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग अब इस मॉडल को गढ़वाल और कुमाऊँ मंडलों में चरणबद्ध रूप से लागू करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य है—
खाद्य स्वच्छता को बढ़ावा देना, मिलावटी तेल पर रोक लगाना और इस्तेमाल हुए तेल के सुरक्षित पुनर्चक्रण को अनिवार्य बनाना।
गणेश कंडवाल की भूमिका बनी आधारस्तंभ
इस प्रभावी मुहिम को आगे बढ़ाने में उप आयुक्त एवं नोडल अधिकारी (सही भोजन भारत – इस्तेमाल किया गया तेल पुनर्चक्रण पहल) गणेश कंडवाल की भूमिका निर्णायक रही है। उनके निर्देशन में तैयार दून मॉडल अब उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरणीय प्रणाली बन गया है।
**मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सख्त संदेश
“जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने दूंगा”**
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा—
> “इस्तेमाल किए गए तेल का दोबारा उपयोग रोकना केवल नियम लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा का संकल्प है। उत्तराखंड ने इस पहल को जन-जागरूकता अभियान में बदलकर देश में नया मानक स्थापित किया है। स्वस्थ उत्तराखंड का लक्ष्य तेजी से पूरा किया जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
**स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य औषधि आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
“एक बार इस्तेमाल हुआ तेल किसी भी स्थिति में वापस भोजन श्रृंखला में नहीं आएगा”**
डॉ. कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह मिशन अब अभियान मोड में चल रहा है। उन्होंने कहा—
> “हमारा लक्ष्य है कि एक बार उपयोग किया गया तेल किसी भी हालत में भोजन श्रृंखला में वापस न लौटे। इसके लिए होटलों, रेस्टोरेंटों, ढाबों और सभी खाद्य व्यवसायियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। अगला चरण तकनीकी निगरानी, बड़े पैमाने पर तेल संग्रहण व्यवस्था और जैव ईंधन निर्माण क्षमता को और मजबूत करने पर केंद्रित होगा।”
उन्होंने कहा कि यह प्रयास न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा कदम है।
स्वच्छ भोजन–स्वस्थ उत्तराखंड की ओर बड़ा कदम
दून मॉडल की सफलता के आधार पर उत्तराखंड अब “शुद्ध भोजन – शुद्ध स्वास्थ्य” की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले समय में यह मॉडल पूरे देश में खाद्य सुरक्षा का उच्चतम मानक बनकर उभरे।
इस मुहिम से न सिर्फ मिलावटखोरी पर रोक लगेगी, बल्कि जनता के स्वास्थ्य को भी दीर्घकालिक सुरक्षा मिलेगी।
