








“शान्तिकुंज है श्रेष्ठ नागरिक गढ़ने की प्रयोगशाला, यह समापन नहीं युग परिवर्तन का शुभारंभ” — राज्यपाल गुरमीत सिंह
अखंड ज्योति शताब्दी समारोह के समापन में गूंजा युग चेतना का संदेश, केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी रहे मौजूद।
दर्पण न्यूज 24/7
देहरादून/हरिद्वार।
हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में आयोजित अखंड ज्योति शताब्दी समारोह के समापन अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि शांतिकुंज केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिक और श्रेष्ठ मानव गढ़ने की आध्यात्मिक प्रयोगशाला है। उन्होंने इसे युग परिवर्तन का शुभारंभ बताते हुए कहा कि भले ही इसे समापन समारोह कहा जा रहा हो, लेकिन वास्तव में यह चेतना के महाकुंभ की शुरुआत है।
राज्यपाल ने कहा कि यह 51 दिवसीय अनुष्ठान केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक और नैतिक पुनर्निर्माण का संकल्प है, जिसे हर नागरिक को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने विश्वभर में सेवा, संस्कार और साधना के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव रखी है। 80 से अधिक देशों में फैला यह आध्यात्मिक आंदोलन करोड़ों अनुयायियों के जरिए युग परिवर्तन की दिशा में कार्य कर रहा है।
उन्होंने शांतिकुंज को युगतीर्थ बताते हुए कहा कि यहां साधना, प्रशिक्षण और सेवा के माध्यम से मानव निर्माण का विराट कार्य हो रहा है। वर्तमान नेतृत्व में गुरुदेव की विचारधारा को समकालीन संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गायत्री परिवार कोई साधारण संस्था नहीं, बल्कि संस्कृति की सरिता, संस्कारों का सागर और अध्यात्म की आलौकिक आभा है। उन्होंने कहा कि अखंड ज्योति केवल बाहरी प्रकाश नहीं, बल्कि अंतरात्मा को प्रकाशित करने वाली ज्योति है, जो बुद्धि को विवेक से, कर्म को धर्म से और जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ती है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज के दौर में भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्य और गायत्री परिवार ही विश्व को शांति और सद्भाव की दिशा दिखा सकते हैं। यह ज्योति निरंतर प्रज्वलित है और मानवता के मार्गदर्शन का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में डा. चिन्मय पंड्या, दलनायक जन्मशताब्दी समारोह, गायत्री विश्व परिवार ने सभी अतिथियों और भक्तों का स्वागत करते हुए आयोजन की जानकारी दी। अखंड ज्योति शताब्दी समारोह के समापन ने सेवा, समर्पण, साधना और प्रज्ञा के संदेश के साथ युग परिवर्तन की नई यात्रा का आह्वान किया।
