🖋️ **“चौकी की छाया में चल रहा काला बाज़ार,
किसके इशारे पर धंधा—किसका है ये ऐतबार?”**
दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी। जनपद नैनीताल में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर अवैध मदिरा के विरुद्ध सख्त अभियान संचालित किया जा रहा है। जिलेभर में छापेमारी, बरामदगी और कार्रवाई की तस्वीरें सामने आ रही हैं, किंतु हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
यहां अवैध मदिरा की खुलेआम बिक्री, जुआ–सट्टे के अड्डे और संदिग्ध गतिविधियां बेखौफ जारी हैं। हैरत की बात यह है कि पुलिस चौकी महज़ कुछ कदमों की दूरी पर स्थित है, फिर भी अवैध कारोबार का यह ‘खुला खेल’ थमता नजर नहीं आ रहा। सवाल साफ है—जब निगरानी पास है, तो निर्भीकता किसके भरोसे?
🔎 होटल-ढाबों की आड़ में फल-फूल रहा अवैध नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार ट्रांसपोर्ट नगर में कुछ होटल और ढाबों की आड़ में लंबे समय से अवैध मदिरा का संगठित कारोबार संचालित हो रहा है। इसी नेटवर्क के माध्यम से जुआ और सट्टे की गतिविधियां भी पनप रही हैं।
शाम ढलते ही क्षेत्र में संदिग्ध भीड़ बढ़ जाती है, लेन-देन तेज हो जाता है और माहौल असामाजिक गतिविधियों से बदरंग हो उठता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब इतना खुला है कि बिना किसी ‘संरक्षण’ के संभव प्रतीत नहीं होता।
⚠️ “दिन की कमाई, रात का दांव” — मजदूर और युवा जाल में
ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का आरोप है कि अवैध मदिरा ने पहले ही मेहनतकश मजदूरों की कमर तोड़ दी है। अब जुआ–सट्टा युवा वर्ग को भी अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है।
दिनभर की मेहनत से कमाई गई मजदूरी रात में दांव पर लग रही है। नतीजतन कर्ज बढ़ रहा है, झगड़े हो रहे हैं और परिवारों में तनाव व अशांति का माहौल गहराता जा रहा है। सामाजिक ताना-बाना धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है।
🏛️ अभियान बनाम जमीनी सच्चाई: क्या ट्रांसपोर्ट नगर ‘नो-गो ज़ोन’?
जिलाधिकारी के निर्देश पर चल रहे अभियान के बीच ट्रांसपोर्ट नगर की स्थिति प्रशासनिक प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है। यदि यहां नियमित छापेमारी, सतत निगरानी और ठोस कार्रवाई हो, तो तस्वीर बदली जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चौकी की मौजूदगी के बावजूद कार्रवाई न होना संदेह को और गहरा करता है। क्या यह क्षेत्र किसी अदृश्य ढाल में सुरक्षित है? या फिर सच्चाई देखने की इच्छा ही नहीं?
📢 प्रशासन से सीधी मांग: नेटवर्क तोड़ो, संरक्षण देने वालों की पहचान हो
स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि ट्रांसपोर्ट नगर में संयुक्त छापेमारी कर अवैध मदिरा, जुआ और सट्टे के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए।
केवल बरामदगी तक सीमित कार्रवाई नहीं, बल्कि इस अवैध धंधे को संरक्षण देने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि इस काले कारोबार की जड़ पर प्रहार हो सके।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—
क्या ट्रांसपोर्ट नगर में फल-फूल रहे इस कथित सिंडिकेट पर सख्त प्रहार होगा,
या फिर “चौकी की छाया में काला कारोबार” यूं ही फलता-फूलता रहेगा?
