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सनातन का सार मानव धर्म, सतपाल महाराज ने दिया सद्भावना सम्मेलन से विश्व शांति का संदेश !
बिंदुखत्ता के श्री हंस प्रेम योग आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब, महाशिवरात्रि पर गूंजा अध्यात्म और समरसता का स्वर!
दर्पण न्यूज24/7 ब्यूरो लालकुआँ (उत्तराखंड)।
सनातन धर्म का मूल तत्व मानव धर्म है, जिसमें सर्व मंगल और विश्व बंधुत्व की भावना निहित है। आज के समय में इसी मानव धर्म की सबसे अधिक आवश्यकता है और सद्भावना सम्मेलन के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। ये उद्गार सतपाल जी महाराज ने बिंदुखत्ता स्थित श्री हंस प्रेम योग आश्रम, संजय नगर द्वितीय में आयोजित विराट सद्भावना सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस भव्य सम्मेलन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के विराट संगम में बदल दिया। महाराज ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है तथा यह पर्व सामाजिक समरसता, सौहार्द और एकता का अमर संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि अध्यात्म मनुष्य को अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देता है और यही आंतरिक अनुशासन बड़े से बड़े आयोजनों को सहज और सफल बनाता है। समुद्र मंथन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हलाहल विष को धारण करने की क्षमता केवल भगवान शिव जैसे दिव्य व्यक्तित्व में ही थी, इसी कारण उन्हें देवों का देव ‘नीलकंठ’ कहा गया।
महाराज ने उत्तराखंड में पर्यटन के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विंटर डेस्टिनेशन की अवधारणा से राज्य में आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार पहाड़ी क्षेत्रों के समग्र विकास और पर्यटन विस्तार के लिए निरंतर प्रयासरत है।
इस अवसर पर अमृता माताजी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में शिव और शक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी को सत्य और सद्मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सद्गुरु समय-समय पर मानवता के कल्याण और धर्म की स्थापना हेतु अवतरित होते हैं और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराते हैं।
सम्मेलन में महात्मा सत्यबोधानंद जी और हरि संतोषानंद जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए वर्तमान समय में सद्भावना और आध्यात्मिक चेतना की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु पूरे समय एकाग्रचित होकर आध्यात्मिक संदेशों को सुनते रहे और पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से ओतप्रोत रहा।
इससे पूर्व प्रातःकाल ब्रह्म बेला में श्रद्धालुओं ने बिंदेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव की आराधना की और पुण्य अर्जित किया। आयोजन के दौरान भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आवागमन की उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई थीं।
सम्मेलन में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, संत-महात्माओं, सेवादल, पुलिस प्रशासन तथा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे आध्यात्मिक एकता और सद्भाव का ऐतिहासिक आयोजन बना दिया।

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