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लखनऊ विश्वविद्यालय में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश
शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवसाय नहीं हो सकते, सबके लिए हों सुलभ
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो लखनऊ,। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को व्यवसाय का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। ये सभी के लिए समान रूप से सुलभ होने चाहिए।
बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शोधार्थी छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया और अपनी व्यवस्था थोप दी, ताकि उन्हें काम करने के लिए “काले अंग्रेज” मिल सकें। अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा है, उसे ठीक करना ही होगा।
‘संघ को समझना है तो संघ में आकर देखें’
भागवत ने कहा कि संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि “मैं और मेरा परिवार ही सबकुछ है” ऐसी सोच से ऊपर उठकर पूरे देश के लिए सोचें। संघ समाज की एकता और गुणवत्ता की चिंता करता है।
उन्होंने कहा कि संघ को पढ़कर नहीं समझा जा सकता, उसे अनुभव करना पड़ता है। संघ सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य करता है और किसी के विरोध में नहीं है। संघ को लोकप्रियता, प्रभाव या शक्ति की इच्छा नहीं है।
शोध की भूमिका अहम
सरसंघचालक ने कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। सत्यपरक और प्रामाणिक शोध सामने आना चाहिए। अज्ञानता के कारण हम भारत को ठीक से समझ नहीं पाए हैं। उन्होंने शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे उत्कृष्टता, प्रामाणिकता और निस्वार्थ भाव से देशहित में शोध करें तथा संघ को लेकर होने वाले दुष्प्रचार के बीच सत्य को सामने लाएं।
‘वैश्वीकरण नहीं, बाजारीकरण है चुनौती’
वैश्वीकरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आज इसका अर्थ बाजारीकरण बन गया है, जो खतरनाक है। भारत “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना में विश्वास करता है, यानी पूरे विश्व को परिवार मानता है।
उन्होंने संयमित जीवन शैली पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति त्याग और आत्मबोध की शिक्षा देती है, जबकि पश्चिमी देशों ने जड़वाद और उपभोगवाद को बढ़ावा दिया। आज विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास है।
उन्होंने कहा कि यदि भारत को विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा, क्योंकि दुनिया सत्य को तभी मानती है जब उसके पीछे शक्ति हो।

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