








संक्रमण को मात देकर भी जिंदगी से हार गया फाटो का ‘भोला’, रेस्क्यू सेंटर में हुई मौत!
पर्यटकों की पसंद बना था फाटो जोन का ‘भोला’—पैर के घाव से उबरा तो निमोनिया ने छीन ली जिंदगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का पूरा राज!
दर्पण न्यूज 24×7 ब्यूरो |
रामनगर। फाटो पर्यटन जोन में कभी पर्यटकों के कैमरों का सबसे पसंदीदा चेहरा रहा बाघ ‘भोला’ अब जंगल में नजर नहीं आएगा। जिस बाघ को गंभीर चोट और संक्रमण की हालत में रेस्क्यू कर उपचार दिया गया था, उसने आखिरकार जिंदगी की जंग हार दी। रेस्क्यू सेंटर में उपचार के दौरान मंगलवार को उसकी मौत हो गई। प्रथम दृष्टया मौत का कारण एस्पिरेशन निमोनिया बताया जा रहा है। वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम के बाद शव को नष्ट कर दिया।
दरअसल, विगत माह फाटो पर्यटन जोन में सफारी के दौरान पर्यटकों की नजर बाघ के पिछले पैर पर पड़ी थी। उसके पैर में गंभीर चोट दिखाई दे रही थी। पर्यटकों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से बाघ को रेस्क्यू किया। 26 जून को ‘भोला’ को उपचार के लिए रेस्क्यू सेंटर लाया गया था।
बताया गया कि बाघ के पैर में किसी नुकीली वस्तु से चोट लगी थी, जिसके चलते वहां संक्रमण फैल गया था। उपचार के बाद करीब एक माह में बाघ संक्रमण से उबर गया और उसकी हालत में सुधार भी बताया गया। लेकिन जिंदगी की यह जंग अभी खत्म नहीं हुई थी। 26 अगस्त को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
वन्यजीव चिकित्सकों के अनुसार एस्पिरेशन निमोनिया ऐसी स्थिति है, जब भोजन, तरल पदार्थ, लार या उल्टी गलती से सांस की नली के जरिए फेफड़ों में पहुंच जाती है। इससे फेफड़ों में संक्रमण और गंभीर सूजन पैदा हो सकती है। कई मामलों में स्थिति तेजी से गंभीर होने पर जान भी जा सकती है।
दस दिन पहले तक स्वस्थ था ‘भोला’
भोला की मौत इसलिए भी सवाल छोड़ गई है क्योंकि पार्क प्रशासन के अनुसार करीब दस दिन पहले भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान की विशेषज्ञ टीम ने रेस्क्यू सेंटर पहुंचकर उसकी जांच की थी। उस समय बाघ को स्वस्थ पाया गया था। दांतों की स्थिति के आधार पर उसकी उम्र करीब आठ से दस वर्ष आंकी गई थी।
चिकित्सकों के मुताबिक उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए भोला के लिए दोबारा जंगल में जाकर सामान्य रूप से शिकार करना संभव नहीं था। इसी वजह से उसे रेस्क्यू सेंटर में ही रखा गया था। पैर के संक्रमण से उबरने के बाद उम्मीद जगी थी कि वह लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगा, लेकिन अचानक निमोनिया ने उसकी जिंदगी छीन ली।
फाटो सफारी की पहचान बन गया था भोला
फाटो पर्यटन जोन में भोला सिर्फ एक बाघ नहीं, बल्कि सफारी पर आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका था। लंबे समय से आसानी से दिखाई देने के कारण पर्यटक उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहते थे। सफारी के दौरान भोला दिखाई देना कई सैलानियों के लिए यादगार अनुभव माना जाता था।
अब उसी ‘भोला’ की मौत ने फाटो जोन की वन्यजीव कहानी में एक दुखद अध्याय जोड़ दिया है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के बीच भी उसकी मौत को लेकर मायूसी है।
वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा के अनुसार प्रथम दृष्टया बाघ की मौत एस्पिरेशन निमोनिया के कारण हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव को नष्ट कर दिया गया है। हालांकि बाघ की मौत का वास्तविक और अंतिम कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब सवाल यही है कि दस दिन पहले तक स्वस्थ बताए जा रहे फाटो के इस लोकप्रिय बाघ की हालत इतनी तेजी से कैसे बिगड़ी? इसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
