राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी’ की प्रतिमा का अनावरण!
राष्ट्रपति ने कहा— आत्मगौरव का सम्मान, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक कदम!
दर्पण न्यूज 24/7
नई दिल्ली। राष्ट्र के आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन परिसर में आजाद भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।
अशोक मंडप के समीप भव्य खुली सीढ़ियों पर स्थापित यह प्रतिमा पहले वहां लगी ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर लगाई गई है। इसे औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को समाप्त कर भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय आत्मगौरव को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
प्रदर्शनी आम नागरिकों के लिए खुली
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने राजाजी के जीवन और योगदान पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। यह प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक राष्ट्रपति भवन स्थित अमृत उद्यान में आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी।
स्वराज का संदेश
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति भवन में राजाजी की प्रतिमा का अनावरण उनके लिए अत्यंत ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने स्मरण कराया कि जब राजाजी शासक निवास (अब राष्ट्रपति भवन) पहुंचे थे, तब उन्होंने अपने कक्ष में रामकृष्ण परमहंस और महात्मा गांधी के चित्र लगाए थे। यह संदेश था कि भले ही भारत औपचारिक रूप से अधिराज्य रहा हो, भारतीयों के हृदय में स्वराज स्थापित हो चुका था।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विरासत पर गर्व करने और गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का राष्ट्रीय अभियान राजाजी के आदर्शों में स्पष्ट रूप से झलकता है। उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर देशवासियों से राजाजी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे राजाजी
राष्ट्रपति ने कहा कि राजाजी विधि, स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक-आर्थिक सुधार, प्राचीन भारतीय ग्रंथों, तमिल एवं अंग्रेजी साहित्य, कविता, संगीत, राजनीति और प्रशासन सहित अनेक क्षेत्रों में अद्वितीय योगदान देने वाले बहुआयामी व्यक्तित्व थे।
‘राजाजी उत्सव’ में उपराष्ट्रपति का संबोधन
‘राजाजी उत्सव’ को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह अनावरण औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्ति की सतत प्रक्रिया का प्रतीक है। शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन इसी दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’ की परिकल्पना को विभिन्न पहलों के माध्यम से साकार किया जा रहा है।
राजाजी की प्रतिमा का यह अनावरण केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना, आत्मगौरव और स्वाधीनता के मूल्यों को पुनर्स्मरण कराने वाला ऐतिहासिक अवसर बन गया।
