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“आजादी के अमृतकाल में भी कंधों पर जिंदगी… सड़क को तरसता सिमतोली, डोली में ढोए जा रहे मरीज”
प्रमोद बमेटा दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो बागेश्वर/उत्तराखंड
एक ओर विकास और अमृतकाल के दावे, दूसरी ओर पहाड़ की हकीकत आज भी दर्दनाक तस्वीर पेश कर रही है। जिले के सिमतोली गांव में सड़क न होने की पीड़ा ने फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को चार किलोमीटर तक डोली का सहारा लेना पड़ा।
चनबोड़ी-सिमतोली और साता-प्यारा गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। सड़क के अभाव में ग्रामीणों का जीवन मानो दशकों पीछे अटका हुआ है। मंगलवार शाम सिमतोली निवासी 29 वर्षीय पूजा देवी के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। गांव में न सड़क, न स्वास्थ्य सुविधा — ऐसे में ग्रामीणों ने मानवता का परिचय देते हुए महिला को डोली में बैठाया और कठिन पहाड़ी रास्तों से चार किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया। वहां से निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2018 में सड़क निर्माण की मांग को लेकर दस दिन तक आंदोलन किया गया था। उस समय तत्कालीन कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय चंदन राम दास ने सड़क निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन सकी।
ग्रामीण बताते हैं कि लोनिवि और पीएमजीएसवाई दोनों विभाग सर्वे कर चुके हैं, वन स्वीकृति भी मिल चुकी है, फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। सड़क न होने से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाना किसी परीक्षा से कम नहीं है। पलायन की मार ऐसी कि गांव के युवा भी रोजगार की तलाश में बाहर जा चुके हैं।
ग्राम प्रधान दीपा देवी, दरवान सिंह मेहता, पूर्व प्रधान आनंद सिंह मेहता, पूर्व सैनिक शोभन सिंह असवाल सहित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो होली के बाद आमरण अनशन किया जाएगा।
“कागज़ों में दौड़ रही विकास की गाड़ियां,
पहाड़ में आज भी कंधों पर चलती हैं जिंदगियां…
डबल इंजन के दावों के बीच,
सिमतोली पूछ रहा — सड़क कब आएगी सरकार?”

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