वादों की होली, उम्मीदों की राख
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव न बनाने पर भड़का जनाक्रोश, विधायक का पुतला दहन!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।
वादों की चादर ओढ़कर सत्ता तक पहुंचने वालों से अब जनता सवाल पूछ रही है।
क्योंकि जो कल तक भरोसे के रंग बिखेर रहे थे,
आज वही वादे धुएं बनकर आसमान में उड़ते नजर आ रहे हैं।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाए जाने के मुद्दे पर 25 फरवरी को हुई राज्य मंत्रिमंडल बैठक में प्रस्ताव न आने से आक्रोशित इंडिया गठबंधन की पार्टियों — कांग्रेस और भाकपा (माले) — के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। काररोड चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार और लालकुआं विधायक डॉ. मोहन बिष्ट का पुतला दहन कर जोरदार विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जनता से बार-बार यह आश्वासन दिया गया कि 25 फरवरी की कैबिनेट बैठक में बिंदुखत्ता समेत वन भूमि पर बसे लोगों को राजस्व गांव का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित होगा। इतना ही नहीं, विधायक द्वारा वीडियो संदेश जारी कर लोगों से 18 फरवरी की संघर्ष समिति की रैली में शामिल न होने की अपील भी की गई थी।
लेकिन जब कैबिनेट बैठक समाप्त हुई तो
न प्रस्ताव आया…
न चर्चा हुई…
और बिंदुखत्ता फिर इंतजार की कतार में खड़ा रह गया।
वक्ताओं ने तंज कसते हुए कहा—
“चार साल तक सपनों की फाइलें खुलती रहीं,
अब कहा जा रहा है कागज अधूरे हैं।
अगर दस्तावेज ही नहीं थे पूरे,
तो वादों के महल आखिर किस बूते खड़े थे?”
इंडिया महागठबंधन नेताओं ने विधायक पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब जिम्मेदारी से बचने के बजाय उन्हें अपनी विफलता स्वीकार कर क्षेत्रवासियों से माफी मांगनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि आगामी 9 मार्च से गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र में बिंदुखत्ता समेत वन भूमि पर बसी आबादी को राजस्व गांव घोषित करने का विधिवत प्रस्ताव पारित कर वन भूमि को राजस्व भूमि में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
इस दौरान भाकपा (माले) नैनीताल जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पुष्कर दानू, मीना कपिल, कुन्दन मेहता, पुष्कर दुबड़िया, गिरधर बम, राजेन्द्र खनवाल, हरीश बिसोती, प्रमोद कलोनी, किशन बघरी, गुरदयाल मेहरा, प्रदीप बय्याल, रमेश कुमार, बिशन दत्त जोशी, गोविंद बल्लभ भट्ट और गोपाल सिंह दानू सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अंत में प्रदर्शनकारियों की आवाज में एक ही दर्द झलकता रहा—
“बिंदुखत्ता आज भी इंतजार में है,
वादों की सरकार किसके साथ है?”*
