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लालकुआं में टिकट से पहले सियासी तूफान!

‘पैराशूट प्रत्याशी’ की आहट से भाजपा में घमासान, जनता बोली — स्थानीय की अनदेखी पड़ सकती है भारी!

दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने भले ही अभी आधिकारिक बिगुल न बजाया हो, लेकिन लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी के भीतर संभावित टिकट को लेकर चल रही हलचल अब खुलकर जनचर्चा का विषय बन गई है।

क्षेत्र में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा तथाकथित ‘पैराशूट प्रत्याशी’ की संभावित एंट्री को लेकर है। राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय की दुकानों और गांव की चौपालों तक एक ही सवाल उठ रहा है — क्या वर्षों से जमीन पर काम कर रहे स्थानीय नेताओं की अनदेखी होगी?

जनता के बीच सक्रिय स्थानीय चेहरे!

लालकुआं विधानसभा में भाजपा के कई ऐसे स्थानीय नेता हैं, जो लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति और जनसेवा से जुड़े रहे हैं। पूर्व विधायक नवीन दुम्का, वर्तमान विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, वरिष्ठ नेता उमेश शर्मा, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष पवन कुमार चौहान तथा सामाजिक-राजनीतिक रूप से सक्रिय कमलेश चंदोला देवेंद्र सिंह बिष्ट देबू जैसे नाम वर्षों से क्षेत्र में जनसमस्याओं, सुख-दुख और सामाजिक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी निभाते रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ये सभी चेहरे विधानसभा की भौगोलिक, सामाजिक और विकास संबंधी जरूरतों को न केवल समझते हैं बल्कि हर परिस्थिति में जनता के बीच मौजूद भी रहे हैं।

“बाहरी को टिकट मिला तो फायदा विपक्ष को”

क्षेत्र में तेजी से फैल रही जनचर्चा के अनुसार यदि पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय दावेदारों की बजाय किसी बाहरी या चुनावी मौसम में सक्रिय हुए चेहरे को टिकट दिया, तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ विपक्षी दल को मिल सकता है।

मतदाताओं का कहना है कि लालकुआं की जनता अब केवल पार्टी नहीं, बल्कि प्रतिनिधि के स्थानीय जुड़ाव और उपलब्धता को भी अहम मानने लगी है।

2022 का संदेश अभी भी याद

जनता के बीच यह भी चर्चा है कि वर्ष 2022 के चुनाव में बाहरी चेहरों को लेकर जो राजनीतिक संदेश सामने आया था, उसे नजरअंदाज करना किसी भी दल के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। मतदाताओं का मानना है कि थोपे गए उम्मीदवारों को स्वीकार करने का दौर अब समाप्त हो चुका है।

टिकट से पहले बढ़ेगी अंदरूनी परीक्षा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 से पहले भाजपा के लिए लालकुआं सीट संगठनात्मक संतुलन की परीक्षा बन सकती है। स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावना और जनता की अपेक्षाओं के बीच संतुलन साधना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल लालकुआं से उठ रही आवाज साफ संकेत दे रही है — “जो वर्षों से साथ खड़ा रहा, जनता उसी के साथ खड़ी दिखना चाहती है।”

यह खबर अब केवल सियासी चर्चा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जनता की उभरती राजनीतिक भावना है।