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सीएम कार्यालय ने लिया संज्ञान: समाजसेवी हेमंत गोनिया की सुरक्षा को लेकर डीजीपी को भेजा मामला, जांच के निर्देश!
दर्पण न्यूज 24/7,हल्द्वानी/देहरादून।
लालकुआं क्षेत्र के समाजसेवी हेमंत सिंह गोनिया की सुरक्षा और उन पर हुए कथित हमले की जांच को लेकर ग्रामीणों की शिकायत पर अब शासन स्तर पर संज्ञान लिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) उत्तराखंड को भेजते हुए जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार लालकुआं क्षेत्र के ग्रामीणों और समाजसेवी गोविंद बल्लभ भट्ट ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को चार अलग-अलग शिकायती पत्र भेजे थे। इनमें समाजसेवी हेमंत गोनिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन पर हुए कथित हमले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी।
आरटीआई के जरिए उठाते रहे जनहित के मुद्दे
ग्रामीणों द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि हेमंत सिंह गोनिया लंबे समय से आरटीआई और जनहित आंदोलनों के माध्यम से क्षेत्र में भू-माफिया, अवैध खनन, शराब माफिया और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर करते रहे हैं। इसके चलते कुछ प्रभावशाली तत्व उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं और उनकी जान को खतरा बताया गया है।
8 फरवरी की घटना को बताया संदिग्ध
शिकायत में 8 फरवरी 2026 को हल्द्वानी के बीडी पंत कॉलेज चौराहे के पास हुई कार टक्कर की घटना को सामान्य दुर्घटना न मानते हुए हमला बताया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि तेज रफ्तार कार से टक्कर मारने की घटना हत्या के प्रयास के तहत की गई, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सीएम कार्यालय ने डीजीपी को भेजा प्रकरण
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुभाग-2 से जारी पत्र में बताया गया है कि प्राप्त आवेदन को आवश्यक कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को भेज दिया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मामला पुलिस विभाग से संबंधित होने के कारण इसे सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) के तहत संबंधित विभाग को स्थानांतरित किया गया है।
SIT जांच और सुरक्षा की मांग
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की एसआईटी या न्यायिक जांच कराने, फर्जी शिकायतें और ई-मेल भेजने वाले गिरोह की पहचान करने तथा समाजसेवी हेमंत सिंह गोनिया और उनके परिवार को तत्काल पुलिस सुरक्षा (वाई या जेड श्रेणी) देने की मांग की है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने किए हस्ताक्षर
शिकायती पत्रों में लालकुआं क्षेत्र की कई ग्राम सभाओं के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, बीडीसी सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर कर कार्रवाई की मांग की है।
कानूनी धाराओं का भी दिया हवाला
पत्रों में आईपीसी की धारा 120-बी, 211, 191-193, 506 और 307 के साथ ही आरटीआई कार्यकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि जनहित में कार्य करने वाले व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब पुलिस कार्रवाई पर टिकी नजर
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामला डीजीपी को भेजे जाने के बाद अब पूरे प्रकरण में पुलिस विभाग की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सूचना आयोग और न्यायालय का रुख भी कर सकते हैं।

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