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“नेटवर्क विहीन कपकोट पर सियासी सवाल: मंत्री की पोस्ट से खुली व्यवस्था की पोल”!
दर्जाधारी मंत्री भूपेश उपाध्याय के बयान पर मचा बवाल, ग्रामीणों की बदहाली पर उठे गंभीर सवाल!

पूर्व मुख्यमंत्री,पूर्व गवर्नर,समेत तमाम दायित्वों का निर्वहन कर चुके वरिष्ठ भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी की राजनीति की


प्रथम पाठशाला है कपकोट।
दर्पण न्यूज 24/7 उत्तराखंड

फाइव-जी और सैटेलाइट इंटरनेट के दौर में उत्तराखंड के सुदूरवर्ती इलाकों की बदहाल संचार व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के प्रथम निर्वाचन क्षेत्र अर्थात उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने वाली विधानसभा कपकोट  क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की कमी को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। ताजा विवाद उस वक्त खड़ा हुआ जब उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा राज्यमंत्री) भूपेश उपाध्याय ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में खुद स्वीकार किया कि वे तीन दिन तक नेटवर्क से पूरी तरह कटे रहे।
इस बयान के सामने आते ही विपक्षी सुर तेज हो गए हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि जब एक दर्जाधारी मंत्री ही नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं, तो आम ग्रामीणों की स्थिति कितनी गंभीर होगी। खासकर आपदा और स्वास्थ्य आपातकाल के समय इन इलाकों में रहने वाले लोगों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।
राजनीतिक हलकों में इसे सरकार की बड़ी विफलता के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कपकोट जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं है, जबकि सरकार डिजिटल इंडिया और आधुनिक कनेक्टिविटी के दावे करती है।
यह मामला इसलिए भी अधिक संवेदनशील हो गया है क्योंकि यह क्षेत्र प्रदेश के वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी की राजनीति का प्राथमिक क्षेत्र रहा है। साथ ही लालकुआं विधानसभा से 2027 की राजनीतिक तैयारी में जुटे दीपेंद्र कोश्यारी का नाम भी इस संदर्भ में चर्चा में है।
स्थानीय जनता का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को केवल दौरे और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर सुविधाओं को सुधारने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूपेश उपाध्याय की यह पोस्ट अनजाने में ही सही, लेकिन सरकार के दावों की हकीकत उजागर कर गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है या यह मामला भी अन्य मुद्दों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।