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एलपीजी-ईंधन आपूर्ति पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
पश्चिम एशिया संकट के बीच उपलब्धता और कीमतों को लेकर छिड़ी बहस!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के मद्देनजर देश में एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों की स्थिति की समीक्षा की गई।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, वैश्विक हालात को देखते हुए मंत्रालयों और संबंधित विभागों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई तथा आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि आम नागरिकों पर किसी प्रकार का दबाव न पड़े और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू बनी रहे।
इस बीच, केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कमी की कोई स्थिति नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के हालिया बयान पर भी सवाल उठाए।
भाजपा सांसदों ने भी सरकार के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में आपूर्ति और कीमतों को संतुलित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। उनका कहना है कि करों में कटौती और भंडारण की बेहतर व्यवस्था से उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है।
वहीं, कांग्रेस ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति का आकलन जमीनी स्तर पर उपलब्धता से होना चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि यदि कोई संकट नहीं है तो उपभोक्ताओं को बिना किसी परेशानी के एलपीजी और ईंधन उपलब्ध होना चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने सरकार की कूटनीतिक पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट रणनीति सामने आनी चाहिए। वहीं, सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने आशंका जताई कि आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ना तय है, जिसका प्रभाव भारत जैसे आयातक देश पर भी दिख सकता है। ऐसे में सरकार के दावे और विपक्ष के सवाल—दोनों ही आने वाले समय में जमीनी हकीकत से परखे जाएंगे।

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