मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सिर्फ बैठकों का दौर या जमीनी एक्शन?
दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी। जनपद नैनीताल में लगातार बढ़ रही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं ने हालात को गंभीर बना दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या अब भी समाधान फाइलों और बैठकों तक ही सीमित रहेगा या सच में जमीन पर बदलाव दिखेगा? सोमवार को काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में सांसद अजय भट्ट की अध्यक्षता में हुई बैठक में बड़े-बड़े निर्देश तो दिए गए, मगर असली चुनौती इन आदेशों को धरातल पर उतारने की है।
बैठक में साफ तौर पर माना गया कि हालात चिंताजनक हैं। वर्ष 2025 में जनपद में वन्यजीवों और सांपों के कारण 27 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक उठाए गए कदम नाकाफी साबित हुए हैं।
सांसद अजय भट्ट ने वन विभाग और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि अब योजनाबद्ध और समन्वित रणनीति के तहत काम किया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने, ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और जंगल से सटे इलाकों में चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि
वन क्षेत्रों से जुड़े गांवों में सोलर लाइट और सोलर फेंसिंग लगाई जाए
झाड़ियों का नियमित कटान हो
जंगल जाने वालों के लिए समय और समूह व्यवस्था तय की जाए
वन्यजीवों की सक्रियता वाले क्षेत्रों में पिंजरे और कैमरे पहले से लगाए जाएं
हालांकि, ये निर्देश नए नहीं हैं—पिछली बैठकों में भी ऐसे ही आदेश दिए जाते रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में बदलाव बेहद धीमा रहा है।
मेयर गजराज सिंह बिष्ट ने भी सुरक्षा के ठोस इंतजामों पर जोर देते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई। वहीं, मुख्य वन संरक्षक तेजस्विनी पाटिल ने दावा किया कि विभाग “युद्ध स्तर” पर काम कर रहा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं इस दावे पर सवाल खड़े कर रही हैं।
डीएम ललित मोहन रयाल ने प्रभावित क्षेत्रों में चारा वितरण और सोलर फेंसिंग के कार्य जारी होने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों की शिकायतें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं—अक्सर मदद देर से पहुंचती है और कई स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम अधूरे हैं।
क्या यह बैठक भी सिर्फ निर्देशों तक सीमित रह जाएगी, या इस बार सच में जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी?
जब तक योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर असर नहीं दिखातीं, तब तक मानव-वन्यजीव संघर्ष की यह लड़ाई सिर्फ आंकड़ों और आश्वासनों में ही उलझी रहेगी।
