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शिलापट विवाद के बीच बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, नामों की राजनीति में उलझा हल्दूचौड़ सीएचसी!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हल्दूचौड़ एक बार फिर विवादों में है। जहां एक ओर शिलापट पर दर्ज नामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाएं भी स्वास्थ्य महकमे और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं।
पूर्व प्रधानाचार्य गोविंद बल्लभ भट्ट ने शिलापट पर अंकित दो नामों पर आपत्ति जताते हुए इसे नियमों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि आरटीआई से मिली जानकारी में भी स्पष्ट है कि ये नाम शिलापट पर नहीं होने चाहिए, इसके बावजूद इन्हें हटाया नहीं जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं।
भट्ट ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हल्दूचौड़ का सीएचसी सिर्फ नाम का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर रह गया है। यहां की व्यवस्थाएं एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से भी बदतर हैं। अस्पताल में न तो पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध हैं और न ही आवश्यक संसाधन, जिससे मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों ने शिलान्यास और लोकार्पण पट पर अपना नाम अंकित कर अपने दायित्व की इतिश्री कर ली है, जबकि अस्पताल अपने मूल उद्देश्य पर खरा नहीं उतर पा रहा। वर्तमान में यह केंद्र मात्र प्राथमिक उपचार और रेफरल सेंटर बनकर रह गया है, जहां से गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों के लिए भेज दिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि इस सीएचसी की आधारशिला पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गापाल द्वारा रखी गई थी। लंबे समय तक लोकार्पण नहीं होने पर भट्ट और समाजसेवी हेमंत सिंह गोनिया ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद केंद्र का संचालन शुरू हो पाया।
अब सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बने इस स्वास्थ्य केंद्र का लाभ आम जनता को कब मिलेगा और क्या जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि केवल नाम दर्ज कराने तक ही सीमित रहेंगे या जमीनी हकीकत सुधारने की दिशा में भी ठोस कदम उठाएंगे।

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