








“अधिकार छीने तो पंचायतें बन जाएंगी सिर्फ नाम की”
ग्राम प्रधान संगठन ने ग्राम प्रधानों की पीड़ा से सरकार को चेताया ।
दर्पण न्यूज 24/7 नैनीताल। पंचायत प्रतिनिधियों की पीड़ा अब खुलकर सड़कों पर उतरने लगी है। ग्राम प्रधान संगठन नैनीताल के जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी ने पंचायतों के अधिकार लगातार छीने जाने पर गहरी नाराज़गी जताते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति रही तो पंचायती राज व्यवस्था केवल कागज़ों तक सिमटकर रह जाएगी।
पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में लगातार कटौती को लेकर ग्राम प्रधानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। जिला ग्राम प्रधान संगठन नैनीताल के जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी ने पंचायतों से नक्शा पास कराने का अधिकार छीने जाने को ग्रामीण लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया है।
उन्होंने कहा कि पंचायत राज एक्ट 2016 के तहत पंचायतों को 29 विषयों पर अधिकार दिए गए थे, लेकिन सरकार इन अधिकारों को मजबूत करने के बजाय लगातार कमजोर कर रही है। उनका आरोप है कि 30 अप्रैल 2026 को देहरादून में हुई बैठक में पंचायत क्षेत्रों में भवन नक्शा पास कराने का अधिकार समाप्त करने का फैसला लिया गया, जिससे ग्रामीण जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
गोपाल अधिकारी ने मार्मिक शब्दों में कहा कि गांव का गरीब व्यक्ति बड़ी मुश्किल से छोटी कृषि आय से दो कमरे का मकान या गौशाला बनाता है। अब उसे नक्शा पास कराने के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे। पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में यह निर्णय ग्रामीणों के लिए भारी परेशानी खड़ी करेगा।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि वर्षों के संघर्ष, समाज सेवा और जनता के विश्वास से चुने जाते हैं, लेकिन आज उनकी हालत “नाम मात्र के प्रतिनिधि” जैसी कर दी गई है। अधिकार लगातार छीने जाने से पंचायत प्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश है।
गोपाल अधिकारी ने सरकार को चेताते हुए कहा कि यदि पंचायतों के अधिकार इसी प्रकार समाप्त किए जाते रहे तो पंचायती राज व्यवस्था का सपना कभी साकार नहीं हो सकेगा। उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से एकजुट होकर अपने संवैधानिक अधिकारों और ग्रामीण जनता के हितों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने साफ कहा कि पंचायतों को मिले 29 विषयों के अधिकार पूरी तरह लागू होने और छीने गए अधिकार वापस मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
