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20 हजार वेतन की अफवाहों से बचें, उत्तराखंड में पड़ोसी राज्यों से ज्यादा न्यूनतम वेतन : श्रमायुक्त पी.सी. दुमका
बाहरी तत्व श्रमिकों को कर रहे गुमराह, कानून तोड़ने वाले उद्योगों पर भी

होगी सख्त कार्रवाई!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | प्रमोद बमेटा
देहरादून। उत्तराखंड में न्यूनतम वेतन को लेकर चल रही चर्चाओं और 20 हजार रुपये वेतनमान की अफवाहों के बीच श्रमायुक्त पी.सी. दुमका ने बड़ा बयान देते हुए साफ कहा है कि राज्य सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने श्रमिकों से दुष्प्रचार से बचने और औद्योगिक शांति बनाए रखने की अपील की है।
श्रमायुक्त ने कहा कि उत्तराखंड सरकार श्रमिक हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और राज्य में वर्तमान न्यूनतम वेतनमान पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार से अधिक है। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतन 12,356 रुपये, हिमाचल प्रदेश में 11,250 रुपये और बिहार में 11,336 रुपये है, जबकि उत्तराखंड में नॉन इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए 13,018 रुपये और इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए 13,800 रुपये न्यूनतम वेतन लागू है।
पी.सी. दुमका ने कहा कि अप्रैल 2026 में इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतनमान में संशोधन किया गया, जो राज्य गठन के बाद पहली बार हुआ है। वहीं वर्ष 2024 में घोषित नॉन इंजीनियरिंग वेतनमान पर हाईकोर्ट से श्रमिकों के पक्ष में फैसला आने के बाद उसका वीडीए भी लागू कर दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व अपने निजी स्वार्थों के चलते श्रमिकों को गुमराह कर रहे हैं और यह भ्रम फैला रहे हैं कि न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये हो गया है या जल्द होने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की बातों का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
श्रमायुक्त ने कहा कि श्रम विभाग ने सभी एलसी, डीएलसी और लेबर इंस्पेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, ओटी भुगतान, बोनस, ईएसआई, गेट पास और अन्य सुविधाएं समय पर मिलें। यदि कोई उद्योग श्रम कानूनों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि श्रमिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सड़कों पर उतरने या फैक्ट्री गेट पर बैठने के बजाय सीधे श्रम विभाग से संपर्क करें। इसके लिए विभाग ने 24×7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। साथ ही हर जिले में मौजूद श्रम अधिकारियों के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
अंत में पी.सी. दुमका ने उद्योगों और श्रमिकों दोनों से अपील की कि वे सहयोग और सहअस्तित्व की भावना से काम करें। उन्होंने कहा, “उद्योग रहेंगे तो रोजगार रहेगा और रोजगार रहेगा तो उद्योग भी चलते रहेंगे।”

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