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पिथौरागढ़ के जंगलों में दिखी उड़न गिलहरी, जैव विविधता का सकारात्मक संकेत।

दर्पण न्यूज 24/7 | पिथौरागढ़

पिथौरागढ़ के चंडाक क्षेत्र के घने जंगलों में दुर्लभ उड़न गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरल) दिखाई देने से वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। इस दुर्लभ जीव की तस्वीरें स्थानीय साइकिल चालक अनिल महरा ने अपने कैमरे में कैद कीं, जो अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। तस्वीरों में उड़न गिलहरी ऊंचे पेड़ पर बैठी नजर आ रही है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य गिलहरी और उड़न गिलहरी में बड़ा अंतर होता है। सामान्य गिलहरी जहां केवल दौड़ने और छलांग लगाने तक सीमित रहती है, वहीं उड़न गिलहरी के पैरों के बीच एक पतली झिल्ली होती है, जिसकी मदद से वह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में फिसलते हुए पहुंच जाती है। हालांकि यह पक्षियों की तरह उड़ती नहीं, बल्कि ग्लाइड करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उड़न गिलहरी लगभग 100 मीटर तक हवा में ग्लाइड कर सकती है। यह प्रजाति मुख्य रूप से रात्रिचर होती है और दिन के समय ऊंचे पेड़ों में छिपी रहती है। इसका पसंदीदा आवास घने और मिश्रित वन माने जाते हैं।

इस दुर्लभ जीव के दिखाई देने पर पिथौरागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी दिनेश जोशी ने इसे क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की संवेदनशील प्रजातियां केवल शांत, कम प्रभावित और पर्यावरणीय रूप से स्वस्थ क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं।

वन्यजीव जानकारों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्रों के घने जंगलों में पाए जाने वाले इस निशाचर जीव की तस्वीरें लेना भी किसी विशेष उपलब्धि से कम नहीं माना जाता।

प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव विविधता के लिए प्रसिद्ध चंडाक क्षेत्र में उड़न गिलहरी की मौजूदगी ने इलाके की पारिस्थितिक महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया है।

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