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हरदा के कार्यक्रम में भगत दा के बयान से गरमाई राजनीति!

पुराने राजनीतिक किस्से ने लालकुआं की सियासत में बढ़ाई हलचल!

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो देहरादून।

आज पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के जीवन पर बनी डाक्यूमेंट्री के विमोचन कार्यक्रम में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने साल 2002 की राजनीति से जुड़ा एक पुराना किस्सा सुनाया।

भगत दा ने कहा कि जब 2002 frमें उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब लोगों को लग रहा था कि हरीश रावत मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी बने। उन्होंने बताया कि उस समय कई कांग्रेस विधायक तिवारी सरकार से नाराज होकर उनके पास आते थे।

कोश्यारी ने यह भी बताया कि उन्होंने एक दिन हरीश रावत से कहा कि अब उन्हें भी तैयारी कर लेनी चाहिए। इस पर हरदा ने जवाब दिया कि जैसे भगत दा बीजेपी और आरएसएस नहीं छोड़ सकते, वैसे ही वह कांग्रेस और गांधी परिवार को नहीं छोड़ सकते।

अब भगत दा के इसी बयान के बाद राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। क्योंकि हरीश रावत और नारायण दत्त तिवारी के बीच मतभेद पहले भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में पुराने किस्से को मंच से दोबारा सुनाना कई लोगों को बड़ा राजनीतिक संकेत लग रहा है।

इसका असर अब लालकुआं विधानसभा में भी देखने को मिल रहा है। यहां भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे के चुनाव लड़ने की चर्चाएं पहले से चल रही हैं। समर्थक जहां माहौल बनाने में जुटे हैं, वहीं विरोधी अब इस बयान को मुद्दा बनाने लगे हैं।

राजनीतिक लोगों का कहना है कि लालकुआं में आज भी तिवारी समर्थकों का अच्छा प्रभाव माना जाता है। ऐसे में पुराने राजनीतिक विवादों की चर्चा युवा कोश्यारी के लिए मुश्किल बढ़ा सकती है।

फिलहाल, हरदा की डाक्यूमेंट्री का कार्यक्रम अब राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

उत्तराखंड