








“शतरंज की बिसात पर मुस्कुराहटों की चाल, गदरपुर की मुलाकात से गरमाए सियासत के सवाल”
दर्पण न्यूज 24/7
उत्तराखंड की राजनीति में कई बार कुछ मुलाकातें ऐसी होती हैं, जिनकी तस्वीरें ही बड़े-बड़े राजनीतिक बयानों का काम कर जाती हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय के आवास पहुंचना भी ऐसी ही एक राजनीतिक चाल माना जा रहा है, जिसने सत्ता के गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
राजनीतिक जानकार इस भेंट को महज शिष्टाचार मुलाकात मानने को तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के भीतर संगठनात्मक एकजुटता और राजनीतिक संतुलन साधने की कवायद के रूप में इस मुलाकात को देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब प्रदेश में सत्ता विरोधी माहौल की चर्चाएं तेज हैं और भाजपा चुनावी रणनीति को धार देने में जुटी है, मुख्यमंत्री का स्वयं पांडेय के घर पहुंचना कई संकेत छोड़ गया है।
पिछले कुछ वर्षों में अरविंद पांडेय और मुख्यमंत्री धामी के संबंधों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक अटकलें लगती रही हैं। पांडेय कई मौकों पर सरकार की कार्यशैली को लेकर अप्रत्यक्ष टिप्पणियां कर चुके हैं। उनके कुछ बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय भी बने। ऐसे में दोनों नेताओं की यह सहज और आत्मीय मुलाकात राजनीतिक पर्यवेक्षकों को सामान्य नहीं लग रही।
भाजपा के भीतर अरविंद पांडेय को एक मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में देखा जाता है। पांच बार विधायक चुने जा चुके पांडेय की तराई क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। यही कारण है कि उनकी राजनीतिक भूमिका और भविष्य को लेकर समय-समय पर चर्चाएं उठती रही हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का यह कदम पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की असहजता या संभावित असंतोष को समय रहते साधने का प्रयास भी हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को उस पृष्ठभूमि से भी जोड़कर देख रहे हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी विभिन्न अवसरों पर पांडेय के समर्थन में खुलकर खड़े दिखाई दिए थे। भाजपा की आंतरिक राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि पांडेय केवल एक विधायक नहीं, बल्कि संगठन के भीतर प्रभाव रखने वाले नेताओं में शामिल हैं।
चर्चाओं को हवा देने वाला तथाकथित “लेटर बम” प्रकरण भी अभी पूरी तरह राजनीतिक स्मृतियों से ओझल नहीं हुआ है। भले ही अरविंद पांडेय ने उस विवाद से सार्वजनिक रूप से दूरी बना ली हो, लेकिन उस घटनाक्रम ने भाजपा के भीतर चल रही हलचलों की ओर संकेत जरूर किया था। ऐसे में मुख्यमंत्री और पांडेय की यह मुलाकात कई राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित करती दिखाई दे रही है।
उत्तराखंड की राजनीति का इतिहास बताता है कि छोटे-छोटे संगठनात्मक मतभेद भी चुनावी परिणामों पर बड़ा असर छोड़ते हैं। यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व आगामी चुनावों से पहले हर प्रभावशाली चेहरे को साथ लेकर चलने का संदेश देना चाहता है।
फिलहाल भाजपा इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार बता सकती है, लेकिन सियासत के जानकारों की नजर में गदरपुर में चली यह शतरंजी चाल आने वाले दिनों की राजनीति का महत्वपूर्ण संकेतक बन सकती है। मुस्कुराहटों के बीच हुई इस मुलाकात ने इतना तो साफ कर दिया है कि चुनावी रण से पहले भाजपा अपनी बिसात पर सभी मोहरों को मजबूती से सजाने में जुट गई है।
